क्या होती है आदर्श आचार संहिता, जो 2026 विधानसभा चुनावों के एलान के साथ हुई लागू?
निर्वाचन आयोग ने 4 राज्यों और 1 केंद्रशासित प्रदेश (पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, पुडुचेरी) में विधानसभा चुनावों की घोषणा ...और पढ़ें

आदर्श आचार संहिता किसी राज्य में चुनाव के तारीखों की घोषणा होने के तुरंत बाद से ही लागू हो जाती है

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने रविवार को 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश विधानसभा चुनाव का एलान कर दिया है। इनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी शामिल है। पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी।
वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। असम, केरल और पुडुचेरी में एक साथ 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेश के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही अब इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
क्या होती है आदर्श आचार संहिता?
आदर्श आचार संहिता यानी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट नियमों का वह समूह है, जिसे चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को मार्गदर्शन देने के लिए जारी किया जाता है। इससे स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित होता है।
आदर्श आचार संहिता किसी राज्य में चुनाव के तारीखों की घोषणा होने के तुरंत बाद से ही लागू हो जाती है। यह चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक लागू रहती है।
आदर्श आचार संहिता में किन नियमों का जिक्र है?
- धर्म, जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जा सकती
- मतदान केंद्रों के पास रिश्वत देना, डराना-धमकाना, किसी और के नाम पर वोट डालना या प्रचार करना प्रतिबंधित है
- राजनीतिक दलों को एक-दूसरे की नीतियों और काम की आलोचना करनी चाहिए, किसी के निजी जीवन पर टिप्पणी करना गलत है
- सरकारी जनसंचार माध्यमों का उपयोग सत्ताधारी दल के पक्ष में पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए नहीं किया जा सकता
- चुनाव के दौरान सरकार किसी भी नई परियोजना, आर्थिक मदद, नई भर्ती या बुनियादी ढांचे से जुड़े वादों की घोषणा नहीं कर सकती
- किसी की निजी संपत्ति या घर के बाहर बिना अनुमति के पोस्टर लगाना या प्रदर्शन करना प्रतिबंधित है। पुतले जलाना भी मना है
- चुनावी बैठक या जुलूस निकालने से पहले पुलिस और प्रशासन से अनुमति लेना और तय रास्तों का पालन करना अनिवार्य है
- सरकारी विश्राम गृह (रेस्ट हाउस), डाक बंगले और मैदानों पर सभी दलों और उम्मीदवारों का बराबर अधिकार होगा
- मतदान केंद्र के पास उम्मीदवारों द्वारा लगाए गए कैंप सादे होने चाहिए, वहां किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रतीक या झंडे की अनुमति नहीं है
- चुनाव घोषणापत्र संवैधानिक मर्यादा में होने चाहिए और इन्हें वोटिंग से ठीक पहले वाली पाबंदी की अवधि में जारी नहीं किया जा सकता
- सरकारें प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी, सरकारी धन या सरकारी पदों का उपयोग नहीं कर सकतीं
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