जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार और राजनीतिक दलों के बीच संवाद के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कमी शिद्दत से महसूस होती दिख रही है। सोनिया गांधी का साफ मानना है कि मौजूदा एनडीए सरकार ने अहम मुद्दों पर राजनीतिक दलों से सलाह-मशविरा की वाजपेयी की परंपरा से पूरी तरह किनारा कर लिया है।

मोदी सरकार ने नहीं बुलाई कोई बैठक: सोनिया गांधी

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली के दंगों के हालत पर प्रधानमंत्री की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की जरूरत से जुड़े सवाल पर सोनिया ने वाजपेयी के दौर को याद किया। सोनिया का कहना था 'पूर्व में ऐसा होता रहा है। वाजपेयी सरकार के समय में भी ऐसा होता था, उन दिनों मैं विपक्ष की नेता हुआ करती थी। जब भी कोई संकट होता था चाहे वह कश्मीर हो या देश में कहीं और किसी प्रकार की चुनौती तब सबसे पहले वे (वाजपेयी) सभी दलों के नेताओं से खुद संवाद करते थे। बहुत से मौकों पर वे खुद बैठक लेते थे। मगर दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमे यह कहना पड़ रहा है कि 2014 से जब से मोदी सरकार सत्ता में आयी है उन्हें जहां तक याद है ऐसी कोई बैठक नहीं बुलाई गई। अभी हाल में एक बैठक गृहमंत्री ने बुलाई है उसमें भी उन्होंने केवल दिल्ली के प्रतिनिधियों को बुलाया और यह सर्वदलीय बैठक नहीं थी। यह एक दुखद तथ्य है मगर यह सच्चाई है।'

दिल्ली में हुए उपद्रव पर सोनिया गांधी ने कहा कि राजधानी के हालात इन दिनों बेहद चिंताजनक है। पिछले 72 घंटों में 20 ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। दिल्ली पुलिस पिछले 72 घंटों में पंगु बनी हुई है। मरने वालों में एक हेड कांस्टेबल भी शामिल है और सैकड़ों लोग अस्पताल में हैं।  दिल्ली की वर्तमान स्थिति के लिए केंद्र और केंद्रीय गृहमंत्री जिम्मेदार हैं।

Posted By: Dhyanendra Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस