रांची, जेएनएन। रांची विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के परिणाम से भाजपा उत्साहित है। 16 कॉलेजों की 80 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा के करीबी छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 50 फीसद से अधिक सीटों (41 सीट) पर जीत हासिल की। वहीं, उसके सहयोगी दल आजसू के स्टूडेंट यूनियन छात्र आजसू को भी दस सीटों पर फतह हासिल हुई है।

कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को महज एक सीट पर संतोष करना पड़ा। दो वर्ष पूर्व हुए चुनाव से अधिक सीटें लाकर अभाविप ने अपनी जड़ें छात्र राजनीति में और गहरी होने का स्पष्ट संकेत दिया है। खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने परिणाम के बाद अभाविप को बधाई देते हुए कहा कि छात्र हित में संगठन हमेशा सक्रिय रहा है। यह उसी का परिणाम है। जाहिर है चुनाव परिणाम संदेश दे रहा कि यूथ को भाजपा की नीतियां पसंद आ रहीं। निश्चित तौर पर भाजपा इस परिणाम को आसन्न लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पूर्व सुखद आहट के तौर पर देख रही है।

हालांकि विपक्षी दल इससे इत्तफाक नहीं रखते। एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार इन चुनावों परिणामों को आम चुनावों के संभावित परिणाम से जोड़कर तो नहीं देखा जा सकता लेकिन राजनीतिक दलों को मंथन तो करना होगा,विशेषकर युवा वोटरों के संदर्भ में। चूंकि चुनाव का प्रचार पार्टी की विचारधाराओं के आधार पर किया गया। तकरीबन सभी राजनीतिक दलों की छात्र इकाईयां इन चुनावों में उतरीं भी। 

युवाओं ने कांग्रेस और झामुमो को बताई औकात : भाजपा 

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव की मानें तो रांची विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में झामुमो और कांग्रेस को युवाओं ने उनकी हैसियत का एहसास करा दिया है। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हेमंत सोरेन और डॉक्टर अजय कुमार झारखंड की सत्ता पर कब्जा होने के ख्वाब देख रहे थे और रांची विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में युवाओं ने इन्हें इनकी राजनीतिक औकात बता दी। शाहदेव ने कहा कि हेमंत सोरेन को उनकी पार्टी के कार्यकर्ता युवा हृदय सम्राट कहते थे। लेकिन इसी युवा हृदय सम्राट की छात्र इकाई को रांची विश्वविद्यालय चुनाव में करारी हार मिली। इस से साफ हो गया कि युवाओं में इनका कोई जनाधार नहीं है। 

व्यापक फलक पर नहीं पड़ेगा असर : कांग्रेस 

कांग्रेस छात्रसंघ चुनाव और इनके परिणामों को किसी भी चुनाव का बहुत छोटा फलक बताती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव कहते हैं कि स्थानीय मुद्दों पर चुनाव का परिणाम आया है। व्यापक फलक पर इसका कोई असर नहीं दिखेगा। विश्वविद्यालय के छात्र कुल मतदाताओं का दहाई हिस्सा भी नहीं हैं। ऐसे में स्वत: यह आकलन किया जा सकता है कि इसका प्रभाव भावी चुनाव पर कितना पड़ेगा। 

पिछले चुनावों में भी एबीवीपी ने लहराया था परचम 

छात्रसंघ के पिछले चुनावों में भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का दबदबा कायम रहा था। एबीवीपी ने कोल्हान और सिदो-कान्हू विश्वविद्यालय चुनाव की तकरीबन सभी सीटों पर परचम लहराया था। रांची विश्वविद्यालय में भी साठ फीसद चुनाव में जीत हासिल की थी। 

 

Posted By: Tanisk