संजय मिश्र, नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खिलाफ राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की आक्रामक रणनीति पर कुछ हलकों में भले सवाल उठाए गए हों मगर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने तेवरों से साफ कर दिया है कि मोदी के खिलाफ सीधी राजनीतिक लड़ाई का अपना सियासी ट्रैक वे नहीं बदलेंगे। आम चुनाव में कांग्रेस की बड़ी हार के बाद अपनी पहली सार्वजनिक रैली में राहुल ने जहां अपने राजनीतिक तेवर और कलेवर में बदलाव नहीं करने के इरादे स्पष्ट कर दिए, वहीं नोटबंदी से लेकर जीएसटी की खामियों और डोकलाम से लेकर बेरोजगारी के सवालों को उठाते हुए यह भी साफ कर दिया कि भाजपा के चुनाव जीतने के बाद भी कांग्रेस इन मुद्दों की आंच धीमी नहीं पड़ने देगी।

नोटबंदी और जीएसटी का मुद्दा फिर उठाया

महाराष्ट्र की अपनी पहली चुनावी रैली में 15 सबसे अमीर लोगों का 5.5 लाख करोड़ रुपये कर्ज माफ करने की बात हो, नौकरी मांगने वाले युवाओं को सरकार की ओर से अनुच्छेद 370 और चांद दिखाना। किसानों की दुर्दशा पर चुप्पी का सवाल हो या फिर नोटबंदी-जीएसटी के जरिये आम आदमी का पैसा निकालकर अमीरों की जेब में डालने की बात।

राहुल गांधी ने इन मुद्दों को लेकर सीधे-सीधे पीएम मोदी पर न केवल सवाल दागे बल्कि तीखे प्रहार किए। लोकसभा चुनाव में भी राहुल ने इन मुद्दों को बड़ी आक्रामकता से उठाया था मगर कांग्रेस को लगातार दूसरे आम चुनाव में बड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा। खुद राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और पार्टी अभी अपने गहरे संकट के दौर से बाहर नहीं आ पायी है।

सीधे प्रहार करने से गुरेज नहीं करेंगे राहुल गांधी

इसीलिए महाराष्ट्र में राहुल के पहले दिन की चुनावी रैलियों पर सियासी निगाहें लगी थीं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने लातूर और मुंबई की दोनों रैलियों के जरिये साफ कर दिया कि पीएम मोदी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद भी उनकी शख्सियत पर सीधे प्रहार करने से गुरेज नहीं करेंगे। पीएम मोदी पर प्रहार जारी रखने के साथ जो राहुल गांधी की रणनीति में जो बदलाव दिख रहा है वह है कि अब वे राजनीति और देश के विमर्श को एक खास दिशा में ही जारी रखने पर जनता को सीधे जागरूक करेंगे। लातूर रैली में देश के ज्वलंत मुद्दों को भटकाने की पीएम मोदी की कोशिशों में मीडिया को सीधे साझीदार बता राहुल ने इसके साफ संकेत दे दिए।

नकारात्मक प्रहार का चुनाव में हुआ था नुकसान

राहुल का यह संदेश कांग्रेस के उन नेताओं के लिए भी नसीहत है जो मोदी पर ज्यादा तीखे हमले से पार्टी को नुकसान होने की बात कह चुके हैं। शशि थरूर और अभिषेक सिंघवी जैसे नेताओं ने तो यह भी कहा था कि पीएम पर नकारात्मक प्रहार का भी चुनाव में नुकसान हुआ। मगर अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद अपनी पहली सार्वजनिक सभा के जरिये इस नजरिये को खारिज कर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया कि राहुल ने भले पार्टी की कमान छोड़ दी है मगर कांग्रेस ने उनकी तय की हुई राजनीतिक लाइन नहीं बदली है।

राहुल गांधी की महाराष्ट्र की चुनावी सभाओं पर निगाहें लगाए कुछ एक वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने लातूर की रैली के बाद अनौपचारिक चर्चा में कहा कि कांग्रेस के लिए यह संबोधन चुनाव से भी कहीं आगे के हैं। पार्टी कैडर के लिए इसमें संदेश साफ है कि चाहे विरोधी जितना प्रहार करें उनका डटकर सीधा मुकाबला करना ही राजनीतिक वापसी का एकमात्र रास्ता है। AICC (All India Congress Committee) के एक पदाधिकारी की टिप्पणी थी कि जब कांग्रेस नेताओं पर मुकदमों और छापेमारी की बाढ़ है और उन्हें जेल तक भेजा जा रहा उसमें ऐसे तेवरों से कार्यकर्ताओं के टूटे मनोबल को लड़ने का हौसला देगा।

यह भी पढ़ें: चुनावी रैली से बोले राहुल गांधी, मेड इन चाइना पॉलिसी भारत के युवाओं को कर रही बेरोजगार

यह भी पढ़ें: बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी पार्टी, 'टैलेंट पूल' के जरिए संभावित उम्मीदवार चुनेगी भाजपा

Posted By: Dhyanendra Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप