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राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को फिर दी खुली बहस की चुनौती, निर्मला सीतारमण का पलटवार

Published: Wed, 04 Nov 2026 05:43 AM (IST)Updated: Wed, 04 Nov 2026 06:18 AM (IST)

सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी सोशल मीडिया पर चुनौती देने जितना उत्साह संसद में बहस के लिए क्यों नहीं ...और पढ़ें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के इस बयान पर तीखा जवाब दिया है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के इस बयान पर तीखा जवाब दिया है

HighLights

  1. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के इस बयान पर तीखा जवाब दिया है

  2. सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी बस सोशल मीडिया पर चुनौती देते हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर से खुली बहस की चुनौती दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कोई भी मंच या जगह चुन लें और उनसे बहस करें।

राहुल गांधी ने लिखा कि कोई भी मंच, कोई भी जगह चुन लो और मुझसे इस पर बहस करो - कौन राष्ट्रविरोधी है? किसके विदेशी ताकतों से संबंध हैं? और उन संबंधों की प्रकृति क्या है? जल्द से जल्द ये कर लो। हम दोनों होंगे। मीडिया होगी। देश के युवा होंगे। एक टेबल होगी। तुम एक तरफ बैठोगे, मैं दूसरी तरफ। जज तुम जो चाहो नियुक्त कर सकते हो। मोहन भागवत जी को भी जज बना सकते हो।

इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में विशेष सत्र बुलाने और ईवीएम, एसआईआर समेत मुद्दों पर बहस की चुनौती दी थी। शाह ने कहा था कि राहुल गांधी संविधान को हाथ में लेकर चलते हैं लेकिन उसका सम्मान नहीं करते और संसद चलने नहीं देते।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के इस रवैये पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि राहुल जी, आप प्रधानमंत्री से बहस के लिए जगह चुनने को कहते हैं। जगह तो पहले से ही है - संसद, जहां आप लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। कल ही गृह मंत्री अमित शाह ने एसआईआर और ईवीएम पर विशेष सत्र की पेशकश की थी। सोशल मीडिया पर चुनौती देने जितना उत्साह संसद में बहस के लिए क्यों नहीं दिखाते? जवाब मांगने के साथ-साथ जवाब सुनने की जिम्मेदारी भी होती है।

सीतारमण ने आगे कहा कि आप लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात करते रहते हैं। लेकिन उसी सम्मान को उन संस्थाओं के साथ भी दिखाना चाहिए जो संविधान ने बनाई हैं। आप कहते हैं डरो मत। तो तथ्य लेकर आओ, जांच का सामना करो और जवाब सुनने के लिए रुको। सदन में उसी बहस के मानकों का पालन करो जिसकी तुम दूसरों से मांग करते हो।

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी कहा कि अगर राहुल गांधी को संसदीय लोकतंत्र में थोड़ा भी विश्वास है तो उन्हें अमित शाह की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए और संसद में मुद्दे उठाने चाहिए।

कांग्रेस ने अमित शाह के प्रस्ताव पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर वे गंभीर हैं तो पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित करें और एसआईआर प्रक्रिया को स्थगित करें।

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