माला दीक्षित, नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले में बुधवार को अखिल भारतीय श्रीराम जन्मभूमि पुनुरुद्धार समिति ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राम जन्मभूमि के राजस्व रिकार्ड में छेड़छाड़ हुई है और वह गुरुवार को कोर्ट को उसे दिखाएंगे। इन दलीलों पर सुनवाई कर रही पीठ ने वकील पीएन मिश्रा से कहा कि वह उन दस्तावेजों का संदर्भ कोर्ट को बताएं जिन पर भरोसा करके वह ये दलीलें दे रहे हैं। बुधवार की शाम को ही मिश्रा की ओर से कोर्ट स्टाफ को संबंधित दस्तावेजों के बारे में बताया गया। गुरुवार को इस मसले पर विस्तृत बहस होगी।

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ आजकल मामले पर रोजाना सुनवाई कर रही है। बुधवार को पीएन मिश्रा और रंजना अग्निहोत्री ने समिति का पक्ष रखा। मिश्रा ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद न होने के अपने दावे को साबित करने के लिए बाबरनामा, आइने अकबरी, हुमायूनामा, तुर्के जहांगीरी का जिक्र किया और कहा कि इन पुस्तकों में अयोध्या में मस्जिद होने की बात नहीं कही गई है।

औरंगजेब ने मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनवाई
उन्होंने इस्लामिक कानून का भी जिक्र किया और कहा कि तीन तरह के इस्लामिक शासन होते हैं। दारुल इस्लाम, दारुल हरब और दारुल अमन। इन तीनों की अलग अलग व्याख्या की। उन्होंने कहा कि बाबर न तो अयोध्या आया था और न ही उसने वहां मस्जिद बनवाई थी। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अगर बाबर ने वहां मस्जिद नहीं बनवाई थी तो जो विवादित ढांचा था उसे किसने बनवाया था। इस पर मिश्रा ने कहा कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनवाई थी।

कोर्ट ने कहा कि आप इसे छोडि़ये यह बताइये कि आपका जन्मस्थान पर दावा कैसे बनता है। मिश्रा ने कहा कि अगर कोर्ट उनकी दलील स्वीकार कर लेता है तो सुन्नी वक्फ बोर्ड का केस खत्म हो जाएगा। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपने मुकदमें में वहां बाबरी मस्जिद घोषित करने की मांग की है और विवादित ढांचा ढहने के बाद उन्होंने अपने मुकदमें में संशोधन करके वहां का कब्जा मांगा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सवाल किया कि क्या आपने मुकदमें की मांग में संशोधन का विरोध किया था।

कोर्ट ने पूछा- संशोधित मांग के क्या मायने
मिश्रा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट मे उसका विरोध कर रहे हैं। तभी जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि वह इस बात पर भी विचार करेगे कि जब विवादित ढांचा ढह गया तो उनकी मांग का क्या मतलब रह जाता है और मुकदमें में की गई संशोधित मांग के क्या मायने होंगे।

सुनवाई के अंत में मिश्रा ने कहा कि राम जन्म स्थान के राजस्व रिकार्ड में छेड़छाड़ हुई है और वह उसे कोर्ट को दिखाएंगे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने उनसे कहा कि वह इसके लिए जिन दस्तावेजों और हाईकोर्ट के फैसले के अंशों पर भरोसा कर रहे हैं उनका संदर्भ कोर्ट स्टाफ को आज ही बता दें। इसके बाद सुनवाई खत्म होने पर मिश्रा और रंजना अग्निहोत्री ने राजस्व रिकार्ड में छेड़छाड़ से संबंधित दस्तावेजों का संदर्भ कोर्ट स्टाफ को बताया। स्टाफ सुनवाई के दौरान दस्तावेज तैयार रखता है।

राजस्व रिकार्ड में छेड़छाड़ का आरोप 
रंजना अग्निहोत्री का कहना है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विस्तृत तौर पर यह मुद्दा उठा था और पूरा संदर्भ दर्ज है। 2007 में हाईकोर्ट में एक अर्जी दी गई थी जिसमें राजस्व रिकार्ड (बंदोबस्त) में छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया। इस पर हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने जांच की जिसमे पाया कि छेड़छाड़ हुई है। जन्मस्थान के साथ मस्जिद और जामा मस्जिद शब्द जोड़ा गया।

रंजना कहती हैं कि मामले की फारेंसिक जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ में हुई जिसकी रिपोर्ट में निदेशक ने कहा कि विभिन्न स्याही में विभिन्न लिखावट में शब्द जामा मस्जिद और मस्जिद बढ़ाया गया। रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया कि जिस व्यक्ति ने दस्तावेज तैयार किये हैं उस व्यक्ति ने ये शब्द जामा मस्जिद और मस्जिद नहीं लिखा।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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