नई दिल्ली, प्रेट्र। पंजाब में तेजी से बदलते घटनाक्रम का कांग्रेस पर व्यापक असर होने की आशंका है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री के रूप में जिस तरीके से बाहर किया गया, वह अन्य राज्यों में असंतोष का आधार बन जाएगा। ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, सुष्मिता देव और प्रियंका चतुर्वेदी सहित कई पार्टी नेताओं के बाहर निकलने के बाद से कांग्रेस में असंतोष के सुर मुखर होते जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता अब विभिन्न गुटों में बंटे राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पंजाब के घटनाक्रम के संभावित प्रभाव को लेकर देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं। पंजाब के अलावा केवल यही दो राज्य हैं, जहां पार्टी अपने दम पर सत्ता में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को ट्वीट किया, सेनापति बदले जा रहे हैं-उत्तराखंड, गुजरात, पंजाब..। एक पुरानी कहावत है-सही समय पर उठाया गया छोटा कदम भविष्य की कई बड़ी समस्याओं से बचाता है। लेकिन क्या यह होगा? उनका इशारा कांग्रेस शासित पंजाब में अचानक किए गए नेतृत्व परिवर्तन को लेकर था।

पार्टी में बेचैनी को दर्शाते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उम्मीद जताई कि अमरिंदर सिंह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर कांग्रेसी को देश हित में सोचना चाहिए। कांग्रेस ने पिछले साल राजस्थान में सचिन पायलट द्वारा किए गए विद्रोह का डटकर सामना किया और गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार को बचाने में कामयाब रही। हालांकि राज्य इकाई में अब भी असंतोष का माहौल है।

एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पंजाब के घटनाक्रम का और जगह असर होने की संभावना है। पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ सकते हैं और इससे पार्टी और कमजोर होगी।' एक अन्य नेता ने कहा कि पंजाब में लिए गए फैसले 'खुद को चोट पहुंचाने वाले हैं'। और इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। पार्टी के एक दिग्गज नेता ने कहा कि नेताओं की आकांक्षाएं अक्सर बहुत बड़ी होती हैं। यदि आप सभी आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करते हैं तो कांग्रेस के भीतर संघर्ष बढ़ना तय है। 

Edited By: Tanisk