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भारत के पहले खिलौना मेले का उद्घाटन, मोदी बोले- बच्चों के विकास में खिलौनों की भूमिका को समझें माता-पिता व अध्यापक

India Toy Fair 2021 का आज पीएम मोदी ने उद्घाटन किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय खेल और खिलौनों की ये खूबी रही है कि उनमें ज्ञान होता है विज्ञान भी होता है मनोरंजन होता है और मनोविज्ञान भी होता है।

By Nitin AroraEdited By: Published: Sat, 27 Feb 2021 08:45 AM (IST)Updated: Sat, 27 Feb 2021 12:32 PM (IST)
पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारत खिलौना मेला 2021 का किया उद्घाटन

नई दिल्ली, एएनआइ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शनिवार को सुबह 11 बजे इंडिया टॉय फेयर 2021 का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान खिलौना निर्माताओं से कम प्लास्टिक, अधिक रिसाइकिल करने योग्य सामग्री का उपयोग करने को कहा है। प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, 'खिलौने एक बच्चे के दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और बच्चों में साइकोमोटर और संज्ञानात्मक कौशल को बेहतर बनाने में भी मदद करते हैं। अगस्त 2020 में अपने मन की बात संबोधन में, प्रधान मंत्री ने कहा था कि खिलौने न केवल गतिविधि में वृद्धि करते हैं, बल्कि आकांक्षाओं की उड़ान के लिए भी जरूरी हैं।'

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एक बच्चे के समग्र विकास में खिलौनों के महत्व को ध्यान में रखते हुए, प्रधान मंत्री ने पहले भी भारत में खिलौना निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।...और अब भारत खिलौना मेला 2021 प्रधानमंत्री के इसी दृष्टिकोण के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है।

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-मोदी ने कहा कि आज खिलौना मेला के इस अवसर पर हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इस ऊर्जा को आधुनिक अवतार दें, इन संभावनाओं को साकार करें। अगर आज Made in India की डिमांड है तो आज Hand Made in India की डिमांड भी उतनी ही बढ़ रही है।

-पीएम मोदी बोले- देश ने खिलौना उद्योग को 24 प्रमुख क्षेत्रों में दर्जा दिया है। राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना भी तैयार किया गया है। इसमें 15 मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है ताकि ये उद्योग प्रतियोगी बने, देश खिलौनों में आत्मनिर्भर बनें और भारत के खिलौने दुनिया में जाएं।

-पीएम बोले- खिलौनों का जो वैज्ञानिक पक्ष है, बच्चों के विकास में खिलौनों की जो भूमिका है, उसे अभिभावकों को समझना चाहिए और अध्यापकों को स्कूलों में भी उसे प्रयोग करना चाहिए। इस दिशा में देश भी प्रभावी कदम उठा रहा है, व्यवस्था में जरूरी कदम उठा रहा है।

-मोदी बोले- हमारी परंपराओं, खानपान, और परिधानों में ये विविधतायें एक ताकत के रूप में नजर आती है। इसी तरह भारतीय खिलौना उद्योग भी इस अद्वितीय भारतीय परिप्रेक्ष्य को, भारतीय विचारबोध को प्रोत्साहित कर सकती हैं।

-पीएम ने अपने संबोधन में कहा, 'गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने अपनी कविता में कहा है- एक खिलौना बच्चों को खुशियों की अनंत दुनिया में ले जाता है। खिलौना का एक-एक रंग बच्चे के जीवन में कितने ही रंग बिखेरता है।'

-प्रधानमंत्री बोले- भारतीय खेल और खिलौनों की ये खूबी रही है कि उनमें ज्ञान होता है, विज्ञान भी होता है, मनोरंजन होता है और मनोविज्ञान भी होता है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्ले-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है।

-पीएम मोदी ने खिलौना निर्माताओं से कम प्लास्टिक, अधिक रिसाइकिल करने योग्य सामग्री का उपयोग करने को कहा है।

-पीएम मोदी बोले- आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वो पहले 'चतुरंग या चादुरंगा' के रूप में भारत में खेला जाता था। आधुनिक लूडो तब पच्चीसी' के रुप में खेला जाता था। हमारे धर्मग्रन्थों में भी बाल राम के लिए अलग-अलग कितने ही खिलौनों का वर्णन मिलता है।

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- सिंधुघाटी सभ्यता, मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा के दौर के खिलौनों पर पूरी दुनिया ने रिसर्च की है। प्राचीन काल में दुनिया के यात्री जब भारत आते थे, तो भारत में खेलों को सीखते भी थे और अपने साथ लेकर भी जाते थे।

-इंडिया टॉय फेयर 2021 में बोले पीएम- हमारे खिलौने पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को दर्शाते हैं जो भारतीय जीवन शैली का एक हिस्सा रहा है। अधिकांश भारतीय खिलौने प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से निर्मित हैं। उनमें इस्तेमाल किए जाने वाले रंग प्राकृतिक और सुरक्षित हैं।

-पीएम मोदी बोले- ये हम सब के लिए आनंद की बात है कि आज हम देश के पहले खिलौना मेले की शुरुआत का हिस्सा बन रहे हैं। ये केवल एक व्यापारिक और आर्थिक कार्यक्रम नहीं है, ये देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की एक कड़ी है

-कारीगरों व अन्य लोगों से बातचीत करने के बाद पीएम मोदी ने कहा, 'आप सभी से बात करके ये पता चलता है कि हमारे देश के खिलौना उद्योग में कितनी बड़ी ताकत छिपी हुई है। इस ताकत को बढ़ाना, इसकी पहचान बढ़ाना,आत्मनिर्भर भारत अभियान का बहुत बड़ा हिस्सा है।'

यह मेला 27 फरवरी से 2 मार्च, 2021 तक आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य खरीदारों, विक्रेताओं, छात्रों, शिक्षकों, डिजाइनरों आदि सहित सभी हितधारकों को एक साथ लाने के लिए एक आभासी मंच तैयार करने का है।

इस मंच के माध्यम से, सरकार और उद्योग इस बात पर चर्चा करने के लिए एक साथ आएंगे कि कैसे भारत को क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और निर्यात को बढ़ावा देने के माध्यम से खिलौनों के विनिर्माण और सोर्सिंग के लिए अगला वैश्विक केंद्र बनाया जा सकता है।

30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1000 से अधिक प्रदर्शक अपने उत्पादों को ई-कॉमर्स सक्षम आभासी प्रदर्शनी में प्रदर्शित करेंगे। इसमें पारंपरिक भारतीय खिलौनों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक खिलौने, आलीशान खिलौने, पहेलियां और खेल सहित आधुनिक खिलौने प्रदर्शित किए जाएंगे।

यह मेला कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के साथ कई वेबिनार और पैनल डिस्कशन की मेजबानी भी करेगा, जिसमें टॉय डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की सिद्ध क्षमताएं होंगी। बच्चों के लिए, यह एक अच्छा अवसर है, जिसमें पारंपरिक खिलौना बनाने पर शिल्प प्रदर्शन और खिलौना संग्रहालयों और कारखानों में आभासी तौर से वे शामिल हो सकेंगे।


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