कोलकाता, जागरण संवाददाता। दुनिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है जिसने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बिना प्रगति की हो। भारत से कई महान वैज्ञानिक निकले हैं। हमारा इतिहास हमें गौरवांवित करता है और हमारा वर्तमान भी विज्ञान से काफी हद तक प्रभावित है। उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार से महानगर कोलकाता में शुरू हुए पांचवें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आइआइएसएफ) 2019 को वीडियो कांफ्रेंसिंग केजरिए संबोधित करने के दौरान कहीं।

 उन्होंने कहा कि भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है। यह जिम्मेदारी मानव मूल्यों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी को साथ लेकर चलने की है। सरकार आविष्कार और नवाचार दोनों को संस्थागत सहायता प्रदान कर रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। विज्ञान में विफलता नहीं होती, सिर्फ कोशिश होती है, प्रयोग होते हैं और सफलता होती है। अगर इन बातों को ध्यान में रखकर आप बढ़ेंगे तो विज्ञान के साथ ही जीवन में भी कभी दिक्कत नहीं आएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि देश में आज साइंटिफिक टेंपर एक अलग स्तर पर है।

चंद्रयान-2 रहा सफल

हाल ही में हमारे वैज्ञानिकों ने चंद्रयान 2 पर बहुत मेहनत की थी और इससे बहुत उम्मीदें भी जगीं। सब कुछ योजना के अनुसार नहीं हुआ, फिर भी यह मिशन सफल रहा। उन्होंने कहा कि यदि आप व्यापक परिप्रेक्ष्य में चीजों को देखेंगे तो समझ सकेंगे कि यह भारत की वैज्ञानिक सूची में एक प्रमुख उपलब्धि है। हालांकि, चंद्रयान -2 के चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से पहले ही सात सितंबर को लैंडर विक्रम का संपर्क इसरो से टूट गया था। खैर, अगर लैंडर ऐसा करने में सफल होता तो हम सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाले अमेरिका, रूस और चीन के साथ ही इस सूची में शामिल होते। इसके इतर उन्होंने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के 5वें संस्करण का आयोजन ऐसे स्थान पर हो रहा है, जिसने ज्ञान-विज्ञान के हर क्षेत्र में मानवता की सेवा करने वाली महान विभूतियों को जन्म दिया है। यह महोत्सव ऐसे समय में हो रहा है, जब सात नवंबर को सीवी रमन और 30 नवंबर को जगदीश चंद्र बोस की जन्म जयंती मनाई जाएगी।

थीम के लिए आयोजकों को दी बधाई

मोदी ने इस फेस्टिवल की थीम- 'रिसर्च, इनोवेशन एंड साइंस एंपावरमेंट द नेशन' तय करने के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि यह थीम 21वीं सदी के भारत के मुताबिक है और इसी में हमारे भविष्य का सार है। देश में साइंस और टेक्नोलॉजी का इकोसिस्टम बहुत मजबूत होना चाहिए। एक ऐसा इकोसिस्टम जो प्रभावी भी हो और प्रेरक भी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि साइंस को लेकर हमारे युवा छात्रों में रुचि की एक नई लहर पैदा हुई है। इस शक्ति को, इस ऊर्जा को 21वीं सदी के साइंटिफिक एनवायरमेंट में सही दिशा में ले जाना, सही प्लेटफॉर्म देना, हम सबका दायित्व है। हमारे यहां कहा गया है- 'तत् रूपं यत् गुणा: तत् विज्ञानं यत् धर्म:' यानि आपका बाहरी व्यक्तित्व तभी सार्थक है, जब आप गुणवान होते हैं। इसी तरह विज्ञान वही उपयोगी है, जो समाज के हित में हो।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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