नई दिल्ली, जयप्रकाश रंजन। बुधवार को ईस्ट एशिया समिट की बैठक में पीएम नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने हिंद प्रशांत महासागर में तनाव और इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन का मुद्दा उठाया। इन दोनों नेताओं की तरफ से चीन के लिए बेहद संवेदनशील इस मुद्दे को उठाने का महत्व इसलिए है कि इस बैठक में चीन के पीएम ली केकियांग भी शामिल थे। यह भी महत्वपूर्ण है कि इस बैठक की शुरुआत से पहले आस्ट्रेलिया ने हिंद प्रशांत क्षेत्र के दस देशों के संगठन आशियान के साथ समग्र रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की घोषणा की है और जापान के पीएम फुमियो काशिदा ने बगैर किसी लाग लपेट के चीन में मानवाधिकार का मुद्दा उठाया। इस तरह से क्वाड संगठन के सभी चारों सदस्यों ने एक ही मंच से चीन को चुभने वाले मुद्दों को उठाया।

चीन के साथ बिगड़ते रिश्तों को देखते हुए यह बैठक है काफी अहम

ईस्ट एशिया समित का गठन वर्ष 2005 में हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थापित देशों के बीच सहयोग स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया था। बुधवार को वर्चुअल तरीके से हुई बैठक में आशियान के दस देशों (इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, ब्रूनेई, म्यांमार, थाइलैंड, कंबोडिया, सिंगापुर, वियतनाम व लाओस) के अलावा भारत, चीन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और रूस के प्रमुख शामिल हुए हैं। चीन के साथ अमेरिका और भारत समेत आस्ट्रेलिया व दूसरे देशों के लगातार बिगड़ते रिश्तों को देखते हुए इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा था। जो सूचनाएं सामने आ रही हैं, उससे लगता है कि चीन को घेरने में क्वाड देशों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

हिंद प्रशांत क्षेत्र के देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने की योजना का जिक्र

पीएम मोदी ने अपने भाषण में हिंद प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, खुला और सभी के लिए समान अवसर वाला बनाने पर जोर दिया। हिंद प्रशांत क्षेत्र से जु़ड़ी रणनीति में आशियान देशों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात भी उन्होंने उठाई। उन्होंने क्वाड के तहत हिंद प्रशांत क्षेत्र के देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने की योजना का खास तौर पर जिक्र किया और कहा कि भारत इसके लिए पूरी मदद कर रहा है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपने भाषषण में हिंद प्रशांत क्षेत्र को खुला बनाने की वकालत की और कहा कि अमेरिका इस समूचे क्षेत्र को कानून सम्मत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बाइडन ने हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान नहीं करने से पैदा होने वाले खतरे को लेकर चिंता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सहयोगियों के साथ हमेशा खड़ा रहेगा। लोकतंत्र व मानवाधिकार की सुरक्षा के मुद्दे को अमेरिकी समर्थन दे कर बाइडन ने स्पष्ट कर दिया कि उनका निशाना किस देश की तरफ है।

चीन का रवैया काफी आक्रामकता भरा

बताते चलें कि भारत, अमेरिका और कुछ दूसरे देश हिंद प्रशांत क्षेत्र को खुला और सभी के लिए समान अवसर वाला बनाने की वकालत इसलिए करते हैं कि इस क्षेत्र में चीन का रवैया काफी आक्रामकता भरा है। इस क्षेत्र में रहने वाले कई प़़डोसी देशों का आरोप है कि चीन की तरफ से उनकी सामुद्रिक सीमा का उल्लंघन किया जा रहा है। भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच स्थापित क्वाड संगठन की अवधारणा के पीछे भी चीन के इस आक्रामक रवैये को ही दिया जाता है।

बुधवार की बैठक में भी जापान के पीएम किशिदा ने हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडन के विचारों को ही एक तरह से समर्थन दिया और म्यांमार में स्थापित सैनिक तानाशाही की भ‌र्त्सना की। कई देशों ने म्यांमार में सैनिक तानाशाही की आलोचना की है। सनद रहे कि चीन म्यांमार में सैनिक तानाशाही का समर्थन करता है।

ईस्ट एशिया सम्मेलन (ईएएस) रणनीतिक वार्ता के लिए इंडो-पैसिफिक का प्रमुख मंच है। इसमें आशियान के सभी दस देश इंडोनेशिया, ब्रुनेई, मलयेशिया, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस और म्यांमार के प्रमुखों की पीएम मोदी के साथ बैठक होगी। 18वां आसियान-भारत शिखर सम्मेलन आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी की स्थिति की समीक्षा करेगा।

कोरोना और स्वास्थ्य, व्यापार और वाणिज्य, कनेक्टिविटी, और शिक्षा और संस्कृति सहित प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति का जायजा लेगा। कोरोना महामारी के बाद आर्थिक सुधार सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विकास पर भी चर्चा होगी। पीएमओ ने कहा कि आसियान-भारत शिखर सम्मेलन सालाना आयोजित किए जाते हैं। भारत और आसियान को उच्चतम स्तर पर जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

Edited By: Arun Kumar Singh