नई दिल्ली, जेएनएन। कथित पेगासस जासूसी मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में गुरुवार को एक जनहित याचिका दाखिल हुई, जिसमें मामले की कोर्ट की निगरानी में एसआइटी से जांच कराए जाने की मांग की गई है। वकील मनोहर लाल शर्मा की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि पेगासस जासूसी मामले की कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआइटी) से जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह भी मांग की गई है कि कोर्ट घोषित करे कि जासूसी के लिए पेगासस स्पाइवेयर मंगाना गैरकानूनी, असंवैधानिक व अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि पेगासस प्रकरण गंभीर चिंता का मामला है। पेगासस से सिर्फ बातचीत ही नहीं सुनी जा सकती, बल्कि किसी का पूरा डिजिटल प्रिंट हासिल किया जा सकता है। इससे सिर्फ हैक किए गए फोन का मालिक ही नहीं, बल्कि उसके संपर्क में आए सभी लोग प्रभावित होते हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2016 से कंपनी के क्लाइंट एनएसओ ने करीब 50 हजार फोन नंबरों को निशाना बनाया है, जो मेजर न्यूज आउटलेट में लीक हुए हैं। पेगासस सिर्फ सíवलांस टूल नहीं है, बल्कि साइबर हथियार है जिसने भारतीय राजनीति को निशाना बनाया है। याचिका में कहा गया है कि अगर मान भी लिया जाए कि इसका प्रयोग कानूनी था जो कि संदेहपूर्ण है, तब भी पेगासस से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है।

वहीं भाजपा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि बिना किसी आधार के खड़ा किए गए पेगासस जासूसी विवाद के पीछे एक बड़ी वजह संसद में लंबित डाटा प्रोटेक्शन बिल भी है। भाजपा की वरिष्ठ नेता और विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि इस विवाद की वजह डाटा प्रोटेक्शन बिल को रोकना है। उन्‍होंने बताया कि संसदीय समिति ने डाटा प्रोटेक्शन बिल के मसौदे को हरी झंडी दे दी है और अब यह लोकसभा अध्यक्ष के पास स्वीकृति के लिए पहुंच गया है।