नई दिल्ली, प्रेट्र।  देश में अब कुष्ठ रोग के आधार पर तलाक नहीं होंगे। राज्यसभा ने पर्सनल लॉ अमेंडमेंट बिल, 2018 पारित कर दिया है। इसके जरिए पांच पर्सनल लॉ के तहत कुष्ठ के आधार पर तलाक के नियम को खत्म कर दिया गया है। लेकिन सदन के उच्च सदन में उपभोक्ता संरक्षण बिल पास नहीं हो सका। बजट सत्र के आखिरी दिन बुधवार को बिना किसी बहस के ध्वनिमत से पर्सनल लॉ अमेंडमेंट बिल पारित हो गया। इस बिल के पारित होने से हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, तलाक अधिनियम (ईसाई), विशेष विवाह अधिनियम और हिंदू दत्तक एवं संरक्षण अधिनियम कानून के तहत कुष्ठ रोग के आधार पर तलाक नहीं होगा।

विधि आयोग ने कुष्ठ रोग से पीडि़त लोगों के साथ भेदभाव वाले नियमों और प्रावधानों को खत्म करने की सिफारिश की थी। कुष्ठ रोग पीडि़तों के खिलाफ भेदभाव खत्म करने संयुक्त राष्ट्र के उन्मूलन प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में भी भारत शामिल है। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के उपाय करने को कहा था। लेकिन, संसद के उच्च सदन में ग्राहकों को और दिलाने वाला उपभोक्ता संरक्षण विधेयक तृणमूल कांग्रेस और वामदलों के विरोध के चलते पारित नहीं हो सका।

दोनों दलों के विरोध के चलते सदन की कार्यवाही भी 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में कार्यवाही शुरू होने पर भी यह विधेयक पारित नहीं हुआ। टीएमसी का कहना था कि इस विधेयक से केंद्रीय उपभोक्ता इकाई को ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे।  

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