नई दिल्ली, प्रेट्र। पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायु सेना के हवाई हमले पर सवाल उठाकर विपक्ष ने देश हित को नुकसान पहुंचाया। यही नहीं, विपक्ष ने अपने बयानों से पाकिस्तान को भारत की साख पर सवाल उठाने का मौका दे दिया। यह कहना है वित्तमंत्री अरुण जेटली का। जेटली ने कहा कि देश के लिए यूपीए के नेतृत्व वाली सरकार जितनी भयावह थी, उससे कहीं ज्यादा भयावह उसके नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन है।

बालाकोट में हवाई हमले के तुरंत बाद कांग्रेस के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों ने प्रस्ताव पास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पुलवामा और बालाकोट हमले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था।

जेटली ने अपने ब्लॉग में कहा, '(बालाकोट में आतंकियों के खिलाफ भारतीय वायु सेना की कार्रवाई) के बाद विपक्षी दलों द्वारा दिए गए बयानों से भारत के राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचा। इससे पाकिस्तान खुश हुआ और आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई को झुठलाने का एक मौका मिल गया।'

उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर देश को एक सुर में बोलना चाहिए, जैसा कि 1971 की लड़ाई में अटल बिहारी वाजपेयी और जन संघ ने किया था। 21 विपक्षी दलों द्वारा पास प्रस्ताव को अनुचित बताते हुए जेटली ने कहा कि इससे दुश्मनों और पाकिस्तानी मीडिया को इस बयान को ट्रंप कार्ड के रूप में इस्तेमाल करने का भी मौका मिल गया। केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा कि इस मामले पर सरकार ने विपक्ष को दो बार विश्वास में लिया।

अरुण जेटली ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर भी हैरानी जताई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के जरिए देश की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वालों से अपनी सुरक्षा करने का देश को अधिकार है। लेकिन देश के इस अधिकार पर संदेह उठाकर पूर्व प्रधानमंत्री ने खुद को तटस्थ तीसरे पक्ष के रूप में पेश करना चाहा। उन्होंने इस पर भी हैरानी जताई कि पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने बयान में आतंकवाद की निंदा तक नहीं की थी।

पीवी नरसिम्हा राव अवार्ड फॉर लाइफ अचीवमेंट ग्रहण करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति पर कहा था कि खुद को खत्म करने के दोनों देशों के पागलपन से वह दुखी हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि गरीबी, अज्ञानता और बीमारियां दोनों देशों की वास्तविक समस्याएं हैं और उन्होंने दोनों पक्षों के समझदार लोगों से इस मुद्दे पर विचार करने की उम्मीद जताई थी।

जेटली ने कहा, 'कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए ने 2004 से 2014 तक एक भयावह सरकार चलाई। 2014 से 2019 के दौरान उसने और भयावह विपक्ष की भूमिका निभाई।' हवाई हमले से हुए नुकसान का सुबूत मांगने पर उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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