संजय मिश्र, नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के पहले हफ्ते हुए घमासान के बाद अगले सप्ताह बदली रणनीति के तहत विपक्षी दल दोनों सदनों में दिल्ली दंगों के साथ अहम मुद्दों पर सदन में बहस के सहारे सरकार की घेरेबंदी करेंगे। लोकसभा से कांग्रेस के सात सांसदों के निलंबन को लेकर सरकार से जारी तनातनी के बावजूद विपक्ष दिल्ली दंगों की चर्चा में इस विवाद को आड़े नहीं आने देंगे।

होली के बाद दिल्ली दंगो पर चर्चा

विपक्षी खेमे की रणनीति में बदलाव की एक वजह होली के बाद पहले कार्यदिवस को ही दिल्ली दंगों पर चर्चा कराने की सरकार की घोषणा है। बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला हफ्ता विपक्ष और सरकार की जिद में धूल गया। दिल्ली दंगों पर सबसे पहले चर्चा की मांग से विपक्ष पीछे नहीं हटा तो सरकार भी होली के बाद ही चर्चा कराने के रुख पर अडिग रही। इसी घमासान के दौरान गुरूवार को लोकसभा में कांग्रेस के सात सांसदों को निलंबित भी किया गया जिसने तल्खी और बढ़ा दी।

विपक्ष को सदन में चलाने में नहीं है कोई दिक्कत

हालांकि कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि निलंबन की कार्रवाई से पक्ष-विपक्ष के बीच बढ़े तनाव के बावजूद दोनों सदनों में मुद्दों पर बहस ही विपक्षी पार्टियों के हित में है। हंगामे को लंबा खींचा गया तो सरकार उलटे इसे विपक्ष के खिलाफ प्रचारित करेगी। इसीलिए दिल्ली दंगों पर 11 मार्च को बहस शुरू होती है तो फिर विपक्ष को सदन चलाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। सरकार ने लोकसभा में 11 मार्च और राज्यसभा में 12 मार्च को दिल्ली दंगों पर चर्चा की बात कही है।

विपक्षी पार्टियों उम्मीद कर रही हैं कि सरकार इस घोषणा से पीछे नहीं हटेगी तो संसद का गतिरोध टूट जाएगा। जहां तक कांग्रेस सांसदों के निलंबन को वापस लेने का सवाल है तो वह स्पीकर ओम बिड़ला की अगुआई वाली कमिटी की जांच के बाद ही होगा। विपक्ष को मालूम है कि जांच की इस प्रक्रिया में कुछ दिन लगेंगे। ऐसे में कांग्रेस भी निलंबन वापसी को सदन चलाने से नहीं जोड़ेगी।

चिंदबरम ने कसा तंज

निलंबन को सदन चलाने के गतिरोध से अलग रखने का संकेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भी दिया। दिल्ली दंगों पर लोकसभा में 11 मार्च को बहस के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा 'मैंने भी सुना है कि संसद में इस पर बहस हुई है पर पता चला कि यह ब्रिटेन के हाउस आफ ला‌र्ड्स में हुआ है। इसीलिए उम्मीद है कि इस पर गौर करते हुए संसद के दोनों सदनों के हमारे पीठासीन अधिकारी दंगों के मामले पर चर्चा करांएगे।'

विपक्षी दलों की अब सदन में बहस को वरीयता देने की रणनीति के पीछे तर्क यह भी है कि केवल दिल्ली दंगे ही नहीं बल्कि ताजा यस बैंक संकट और आर्थिक मंदी से लेकर सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बर्बर पुलिस कार्रवाई, कश्मीर के हालात और वहां के नेताओं की नजरबंदी जैसे अहम मुद्दे पर सदन में सरकार को घेरा जा सके। संसद में कांग्रेस केएक प्रमुख रणनीतिकार का तो यह भी कहना था कि इस सरकार में विपक्षी दलों की बात किसी प्लेटफार्म पर न सुनी और नहीं दिखाई जाती है। टीवी चैनलों और अखबारों में विपक्ष की आवाज को जगह नहीं मिल रही। ऐसे में ले देकर संसद ही वह मंच बचा है जिसके जरिये विपक्ष अपनी बात जनता तक पहुंचा सकता है। इसीलिए अब विपक्ष की ओर से संग्राम कम और बहस पर जोर ज्यादा रहेगा।

Posted By: Dhyanendra Singh

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