जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनावी साल का असर अब मंत्रिपरिषद के अंदर भी दिखने लगा है। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक में पहली बार किसी खास मंत्रालय या योजना की बजाय ग्राम सुराज जैसे राजनीतिक अभियान पर ध्यान केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने अपने सहयोगी मंत्रियों से आशा जताई कि आने वाले दिनों में उनका और उनके दलों का संपर्क अभियान और तेज होगा।

पहली बार केंद्रीय मंत्रिपरिषद बैठक में राजनीतिक अभियान पर हुई चर्चा

यह किसी से छिपा नहीं कि सत्तापक्ष और विपक्ष की तैयारियां अब चुनाव के बाबत है। एक तरफ जहां विपक्षी दलों में एकजुटता का नारा दिया जा रहा है। वहीं सत्तापक्ष की ओर से सहयोगी दलों को साधने की कोशिशें हो रही हैं। ऐसे में सरकार के स्तर पर भी अब राजनीतिक संदेश ही दिया जाने लगा है।

बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्राम सुराज और संपर्क अभियान पर प्रजेंटेशन हुए और प्रधानमंत्री का भाषण भी उस पर ही केंद्रित रहा। बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन 120 पिछड़े जिलों में ग्राम सुराज अभियान चला है वहां इसकी निगरानी भी होनी चाहिए कि हर घर को केंद्रीय योजनाओं की सुविधा मिली या नहीं। इसे धीरे धीरे और आगे बढ़ाना होगा।

मंत्रियों को भी किसी गांव में रात बिताने को कहा गया था। इसकी भी समीक्षा हुई कि मंत्रियों ने कितनी जिम्मेदारी से साथ जनता से संपर्क बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने उन मंत्रियों और सांसदों की पीठ थपथपाई जिन्होंने जनता का विश्वास जीतने के लिए पूरी मेहनत की।

गौरतलब है कि ग्राम सुराज अभियान में अभी उन्हीं 120 जिलों को शामिल किया गया था जहां दलितों की बड़ी संख्या है। ध्यान रहे कि विपक्ष की ओर से सरकार को दलित विरोधी ठहराने की कोशिश हो रही है। जबकि सरकार की ओर से ऐसे सभी जिलों के हर घर में बिजली, गैस, टीकाकरण, सुरक्षा बीमा जैसी योजना पहुंचाने का अभियान चलाया गया था। इसे और आगे बढ़ाया जाएगा। संभवत: अगस्त तक ही इसे दोगुना करने का प्रयास होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार जनकल्याण की सभी योजनाओं को मुस्तैदी से परवान चढ़ा रही है। इसे जनता तक पहुंचाने में हर किसी को जुटना होगा। 

By Bhupendra Singh