नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि अंधविश्वास, कुरीतियों के खिलाफ महिला सशक्तीकरण की आधुनिक सोच के साथ शुरू हुए महर्षि दयानंद सरस्वती के महाअभियान को आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी अपने जीवन में महर्षि दयानंद की परंपरा को आगे बढ़ाया। कोविंद रोहिणी स्थित जापानी पार्क में बृहस्पतिवार से प्रारंभ हुए चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन के उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।

महासम्मेलन में 32 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। राष्ट्रपति ने कानपुर में आर्य समाज के संस्थान में ली गई अपनी उच्च शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि 19वीं सदी में ही महर्षि दयानंद ने महिला सशक्तीकरण पर बल देते हुए उन्हें पुरुषों के बराबर बताया था। आज महिलाओं की आजादी के लिए हो रहे तमाम आंदोलनों को उनके आंदोलन से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने आर्य समाज को आधुनिक दौर का सबसे प्रासंगिक संगठन करार दिया।

उन्होंने कहा कि आर्य समाज व्यक्ति को पंथ, संप्रदाय, जाति-पाति जैसे बंधनों से मुक्त कर आर्य यानी श्रेष्ठ बनाने में सक्रिय है। भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए महर्षि दयानंद ने जो मंत्र दिए थे, उन्हीं की राह पर चलकर देश आज बुलंदियों पर पहुंच रहा है। राष्ट्रपति ने वैश्विक समस्या बन चुके पर्यावरण प्रदूषण को समाप्त करने में आर्य समाज के यज्ञ और शांति पाठ की परिकल्पना की महत्ता को भी रेखांकित किया।

इस मौके पर स्वागत समिति के अध्यक्ष एमडीएच के महाशय धर्मपाल ने राष्ट्रपति को स्वामी विवेकानंद की तस्वीर और स्मृति चिन्ह भेंट किए। महासम्मेलन में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, सत्यपाल सिंह, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के सुरेश चंद्र आर्य आदि ने भी विचार व्यक्त किए। यह महासम्मेलन 28 अक्टूबर तक चलेगा।

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