मुंबई [राज्य ब्यूरो]। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले देश भर में भाजपा विरोधी महागठबंधन बनाने की कोशिशों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने झटका दे दिया है। पवार का मानना है कि चुनाव से पहले ऐसा गठबंधन हो पाना व्यावहारिक नहीं होगा। हां, भाजपा के विरुद्ध लड़े दल चुनाव बाद एक साथ आ सकते हैं।

एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए शरद पवार ने क्षेत्रीय दलों की अस्मिता का उल्लेख करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में तेलुगु देसम पार्टी के चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना में टीआरएस के के. चंद्रशेखर राव, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और उड़ीसा में बीजू जनता दल के नवीन पटनायक का अपना-अपना जनाधार है। इन सभी के क्षेत्रीय दलों का अपना जनाधार है। ये दल महागठबंधन में मजबूती से नहीं उभर सकते। राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक एवं पंजाब में ही कांग्रेस 'नंबर वन पार्टी' बनकर आ सकती है। इसलिए चुनाव से पहले महागठबंधन की बात व्यावहारिक नहीं लगती।

हालांकि, पवार मानते हैं कि चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा के विरुद्ध लड़ी पार्टियों का एक साथ आना संभव है। पवार के अनुसार ऐसा इसलिए संभव है, क्योंकि इस बार लोकसभा चुनाव का सारा जोर भाजपा विरोध पर होगा। इसलिए ये सब देश की बागडोर भाजपा के हाथों में जाने से बचाने के लिए एक साथ आएंगे। लेकिन चुनाव बाद बनने वाले महागठबंधन की बागडोर राहुल गांधी को मिल सकती है, पवार यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इस सवाल पर वह साफ कहते हैं कि किसी व्यक्ति की स्वीकार्यता महत्वपूर्ण है।

Posted By: Vikas Jangra