भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच 22 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए हैं, जिसके बाद कमलनाथ सरकार का जाना तय है। ये पूरी स्थिति ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद सामने आई है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच कांग्रेस और भाजपा दोनों ने विधायक दल की बैठक बुलाई है।

सीएम हाउस में कांग्रेस विधायक दल की बैठक खत्म होने पर शोभा ओझा और पीसी शर्मा ने कहा कि सभी विधायक कमलनाथ जी के संपर्क में हैं, हमारे पास संख्याबल मौजूद है। बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि जो 22 विधायक गए हैं उन्हें कहा गया था कि राज्यसभा में संख्याबल के लिए ले जाया जा रहा है, उन्हें धोखा देकर साइन कराया गया है।

वहीं कांग्रेस का दावा है कि सीएम कमलनाथ का मास्टरस्ट्रोक आना अभी बाकी है। हालांकि कांग्रेस यह बताने को तैयार नहीं है कि वह कौन का मास्टरस्ट्रोक होगा, जिसके चलते वह सूबे में अपनी सरकार बचाने में कामयाब हो पाएगी। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा का दावा है कि इस्तीफा देने वाले कांग्रेस विधायकों की संख्या 30 तक पहुंचेगी। 

कमलनाथ सरकार को एक और झटका

कांग्रेस की विधायक दल की बैठक में कमलनाथ सरकार को एक और झटका लगा है। इस बैठक में कांग्रेस के महज 88 विधायकों ने हिस्सा लिया है। यानी कांग्रेस के चार और विधायक गायब हैं। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कुल 92 विधायक पहुंचे हैं, जिनमें 4 निर्दलीय हैं। बता दें कि कांग्रेस के कुल 114 विधायक थे, जिनमें से 22 ने खुले तौर पर अपने इस्तीफे दे दिए हैं, जबकि अब चार और विधायक गायब हैं। यानी कुल 26 विधायक कांग्रेस से छिटकते नजर आ रहे हैं।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता पीसी शर्मा से पूछा गया कि इतने इस्तीफों के बाद नंबर गेम के लिहाज से वह सरकार बचाने में कैसे कामयाब हो पाएंगे तो उनका जवाब कमलनाथ के भरोसे था। उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से एक नई बात सामने आएगी। शाम तक आपको कमलनाथ का मास्टरस्ट्रोक देखने को मिलेगा।' हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इतने इस्तीफों के बाद आखिर कांग्रेस की ओर से किस मास्टरस्ट्रोक की संभावना बची रह जाती है।

जानें- अब क्या हो सकता है

मध्य प्रदेश की राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों के जेहन में पहला सवाल यही है कि अब क्या होगा? 19 विधायकों के इस्तीफा पत्र मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति के पाले में सारा खेल आ चुका है। हालांकि उन्होंने इसपर बस इतना ही कहा है कि विधानसभा के नियम जो भी होंगे वे इसपर आगे की कार्रवाई करेंगे। कुछ महीने पहले कर्नाटक में भी ऐसा ही मामला सामने आया था।

अब देखना दिलचस्प होगा कि यहां के स्पीकर एनपी प्रजापति कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे पर क्या रुख अपनाते हैं। एनपी प्रजापति मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और वह मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं। आज शाम में कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी हुई है जिसमें कहा गया है कि सीएम कमलनाथ कई बागी विधायकों के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में कांग्रेस के 88 विधायक ही शामिल हुए और बागी विधायकों को वापस लाने की कोशिशें की जा रही हैं।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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