विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 26, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नए गुल खिला सकती है फड़नवीस और राउत की मुलाकात, भाजपा नेता प्रवीण दरेकर के बयान से गरमाई सियासत

By Krishna Bihari SinghEdited By:
Published: Sat, 26 Sep 2020 10:33 PM (IST)Updated: Sun, 27 Sep 2020 08:49 AM (IST)

एक पांच सितारा होटल में शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस एवं शिवसेना नेता संजय राउत के बीच डेढ़ घंटे ...और पढ़ें

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस एवं शिवसेना नेता संजय राउत के बीच हुई बैठक के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस एवं शिवसेना नेता संजय राउत के बीच हुई बैठक के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है।

ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। एक पांच सितारा होटल में शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस एवं शिवसेना नेता संजय राउत की डेढ़ घंटे की मुलाकात ने कयासों का बवंडर खड़ा कर दिया है। हालांकि, राउत एवं भाजपा दोनों की तरफ से इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकालने की बात कही गई है। लेकिन, फड़नवीस के करीबी नेता प्रवीण दरेकर ने यह कहकर कयासों को बल दिया है कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है। राउत और फड़नवीस की मुलाकात डेढ़ घंटे से अधिक चली।

मुलाकात से पहले इसकी सूचना दोनों दलों की ओर से गुप्त रखी गई थी। बात सार्वजनिक होने पर राउत ने स्पष्टीकरण दिया कि वह शिवसेना के मुखपत्र सामना के लिए फड़नवीस का साक्षात्कार करना चाहते हैं। इसी संबंध में उनसे मिलने गए थे। बता दें कि राउत सामना के कार्यकारी संपादक हैं। बाद में भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने कहा कि फड़नवीस ने इस शर्त पर बिहार चुनाव के बाद सामना को साक्षात्कार देने की बात कही है कि उनकी बात बिना संपादित किए प्रकाशित की जाए।

उपाध्ये और राउत दोनों ने कहा है कि इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकाले जाने चाहिए लेकिन महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर ने कहा है कि राजनीति में कुछ भी संभव है। दरेकर गंभीर प्रकृति के नेता हैं। उनके इस बयान को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

महाराष्ट्र में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा और शिवसेना के रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं। इसी का परिणाम है कि भाजपा के साथ चुनाव लड़नेवाली शिवसेना ने परिणाम आने के बाद कांग्रेस-राकांपा के साथ मिलकर सरकार बना ली। यह गठबंधन सरकार भाजपा को रास नहीं आ रही है। पालघर में संतों की हत्या का मामला हो या सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत, शिवसेना पर हमलावर होने में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ रही।

कोरोना काल में गठबंधन सरकार की विफलता पर हालांकि अभी भाजपा बहुत मुखर नहीं है। लेकिन, आने वाले किसी चुनाव के दौरान यह मुद्दा नहीं उठेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। चार दिन पहले पारित कृषि विधेयक सहित कई ऐसे राजनीतिक मुद्दे हैं, जिन पर शिवसेना का कांग्रेस और राकांपा के साथ कोई तालमेल नहीं बैठता। इसके बावजूद उसे इन्हीं दोनों दलों के साथ मिलकर सरकार चलानी पड़ रही है।

इस विरोधाभास का दंश शीर्ष पर बैठे नेताओं से ज्यादा उन शिवसैनिकों को झेलना पड़ रहा है, जो लंबे समय से कांग्रेस-राकांपा से ही लड़ते आए हैं। चुनावों के समय यह विरोधाभास जमीनी स्तर पर शिवसेना को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। विधानसभा चुनाव के बाद राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनवाने में राउत की भूमिका महत्तवपूर्ण रही थी। फिलहाल राज्यसभा सदस्य राउत को ही गठबंधन सरकार का शिल्पकार माना जाता है।

कुछ दिनों पहले ही राउत ने ट्वीट कर भाजपा-शिवसेना के संबंध सुधरने के संकेत दिए थे। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह मुलाकात दोनों दलों के संबंधों को पुन: गठबंधन के स्तर तक ले जाने का प्रयास है? इस मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटिल ने भी यह कहकर सवाल खड़ा कर दिया है कि वर्तमान सरकार को गिराने का प्रयास हम नहीं करेंगे। लेकिन यदि यह अपने ही अंतर्विरोधों के कारण गिरी, तो आगे क्या होगा? 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।