नई दिल्‍ली, एएनआइ। भारत ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) के फैसले के मुख्य मुद्दे को लागू करने में विफल रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पाकिस्तान आइसीजे के फैसले की मूल भावना को लागू करने में नाकाम रहा है। उसने जाधव को बेरोकटोक राजनयिक पहुंच उपलब्ध नहीं कराई है।

इससे पहले इस माह के शुरू में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए बड़ी पीठ का गठन किया था। जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस पीठ में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनाल्ला, जस्टिस आमिर फारूक और मियां गुल हसन औरंगजेब शामिल हैं। यह पीठ तीन सितंबर से मामले की सुनवाई करेगी। यह फैसला भारत द्वारा पाकिस्तान पर जाधव को राजनयिक पहुंच देने के लिए लगातार दबाव बनाने के बाद आया है।

पाकिस्तानी मीडिया ने इससे पहले रिपोर्ट दी थी कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि भारतीय अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि, भारत ने कहा था कि उसे पाकिस्तानी सरकार से इस मामले में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। प‍िछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि भारत इस विषय में सभी उपलब्ध विकल्प तलाश रहा है। 

बता दें कि भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (50) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी एवं आतंकवाद के आरोप में अप्रैल 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी। भारत ने जाधव को राजनयिक संपर्क मुहैया करने की इजाजत देने से पाकिस्तान के इनकार करने पर हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) का दरवाजा खटखटाया था। भारत ने आइसीजे में जाधव की मौत की सजा को चुनौती दी थी।

दरअसल पाकिस्‍तान आइसीजे के फैसले को लागू करने में टालमटोल का रवैया अपना रहा है जबकि जुलाई 2019 में अपने फैसले में आइसीजे कह चुका है कि पाकिस्तान को जाधव को दोषी ठहराए जाने और सुनाई गई सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार करना चाहिए। इसके अलावा बिना देरी किए भारत को राजनयिक पहुंच की सुविधा देनी चाहिए। बीते दिनों जाधव के लिए एक कानूनी प्रतिनिधि की नियुक्ति से जुड़ी सरकार की याचिका पर इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया था।

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