जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के भारत के फैसले के बाद जिस तरह से पाकिस्तान और चीन इस मुद्दे पर एक दूसरे के साथ आ रहे हैं, उस पर भारत ने दोनों को लताड़ लगाई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी की तीन दिन पहले हुई इस्लामाबाद यात्रा के दौरान जिस तरह से संयुक्त बयान में कश्मीर का जिक्र किया गया है उसे भारत ने पूरी तरह खारिज किया है।

भारत ने दोनों देशों को यह भी याद दिलाया है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला हिस्सा भी भारत का ही है। उस हिस्से पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) बनाया जा रहा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत भी आने वाले थे लेकिन भारत ने उनकी यात्रा को अंत समय में आग्रह कर स्थगित करवा दिया था।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि चीन के विदेश मंत्री की हालिया पाकिस्तान यात्रा के दौरान संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं। जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न हिस्सा है।

दूसरी तरफ हम चीन की व पाकिस्तान की तथाकथित आर्थिक कॉरिडोर को लेकर भी अपनी चिंता जताते हैं। यह जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर बनाया जा रहा है। यह हिस्सा वर्ष 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। भारत किसी भी दूसरे देश की तरफ से पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में फेरबदल करने की कार्रवाई के खिलाफ है। जो भी देश ऐसा कर रहा है उसे तुरंत इन गतिविधियों को रोकना चाहिए।चीन के विदेश मंत्री पिछले हफ्ते पाकिस्तान-चीन-अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय वार्ता में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे।

वहां उनकी पाकिस्तान सरकार के आला अधिकारियों और विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी के साथ अलग-अलग बातचीत हुई थी। दरअसल, जब से भारत ने अनुच्छेद 370 समाप्त किया है तभी से चीन अपने मित्र देश पाकिस्तान के साथ है। भारत के उक्त फैसले के कुछ ही दिनों बाद कुरैशी ने चीन की यात्रा की थी। उसके कुछ ही दिनों बाद चीन की शह पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे पर बैठक का आयोजन किया गया। चीन एक तरफ भारत से कहता है कि कश्मीर मुद्दे का समाधान पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय आधार पर करे जबकि दूसरी तरफ वह पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाता दिख रहा है। 

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Posted By: Monika Minal

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