रायपुर (मृगेंद्र पांडेय)। छत्तीसगढ़ में विधानसभा का टिकट देने के लिए कांग्रेस दावेदारों से न केवल उनके राजनीतिक कद की जानकारी ले रही है बल्कि जाति और उपजाति भी पूछ रही है। पार्टी इस बार दावेदारों से फार्म भरवा रही है। इसमें उनके आपराधिक रिकार्ड से लेकर कई तरह की जानकारी मांगी जा रही हैं। ज्ञात हो, कांग्रेस ने एक से सात अगस्त तक ब्लाक कमेटियों में फार्म जमा करने के लिए अभियान शुरू किया है।

पार्टी के प्रति निष्ठा की शपथ भी लेनी होगी :

नामांकन फार्म में दावेदारों से एक संकल्प पत्र भी भरवाया जा रहा है, जिसमें लिखा है कि पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी, उसे विजयी बनाने के लिए चुनाव में निष्ठापूर्वक काम करेंगे। आमतौर पर टिकट वितरण के बाद दावेदार या तो चुनाव से दूर हो जाते हैं या अधिकृत प्रत्याशी को हराने में जुट जाते हैं। इसी की काट के लिए शपथ पत्र बनाया गया है।

बताना होगा, कितने वोट से जीते, या हारे :

नामांकन फार्म में पिछले चुनाव के बारे में जानकारी मांगी गई है। इसमें दावेदारों को लोस, विस, पंचायत के साथ ही नगरीय निकाय के चुनाव लड़ने तथा जीत और हार के अंतर के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। दावेदार की स्थानीय स्तर पर राजनीतिक साख को परखने के लिए यह कॉलम डाला गया है।

सिंहदेव के खिलाफ कोई दावेदार नहीं :

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने इस व्यवस्था के तहत पहले दिन खुद नामांकन फार्म लिया और जमा भी कर दिया। वहीं, अंबिकापुर से नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के नाम पर सहमति बनने के बाद किसी भी दावेदार ने फार्म नहीं लिया।

‘चंदे की बैसाखी’ पर पार्टी

छत्तीसगढ़ में 15 साल से सत्ता से बाहर बैठी कांग्रेस जबरदस्त आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। कार्यालय चलाने के लिए दिल्ली से मिलने वाला फंड बंद हो गया है। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस को चंदे का सहारा लेना पड़ रहा है। पार्टी विधानसभा चुनाव के दावेदारों से फिर से चंदा वसूल रही है। संकल्प शिविर कराने के लिए पहले ही चंदा लिया जा चुका है। अब पार्टी के निर्माणाधीन प्रदेश कार्यालय को पूरा कराने के लिए सहयोग राशि ली जा रही है। ‘कांग्रेस भवन निर्माण सहयोग राशि’ के नाम से रसीद बुक छपवाई गई है। प्रदेश कार्यालय के लिए फंड का इतना टोटा है कि पार्टी ने सभी मोर्चा-संगठनों, प्रकोष्ठों और विभागों के पदाधिकारियों को भी धन जुटा कर देने के लिए कहा है। हालांकि प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का दावा है कि सहयोग राशि के लिए किसी पर दबाव नहीं डाला जा रहा है।

सहयोग राशि से हो सके संकल्प शिविर

प्रदेश में सभी बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए नेताओं-कार्यकर्ताओं से चंदा लेना पड़ रहा है। 90 में से 86 विस क्षेत्रों में अप्रैल से जून तक सहयोग राशि के दम पर ही संकल्प शिविर हो पाए। अब प्रदेश नेतृत्व पर पार्टी के नए कार्यालय को पूरा करा कर 20 अगस्त को उसका लोकार्पण कराने का दबाव है।

गले की फांस न बन जाए चंदा

चर्चा है कि चंदा गले की फांस न बन जाए। जिन्होंने संकल्प शिविर के लिए चंदा दिया, अब उन्हें पार्टी दफ्तर के लिए भी चंदा देना पड़ रहा है। संकल्प शिविर के दौरान कहा गया था कि इन्हीं में से कोई एक प्रत्याशी होगा,अब सभी के लिए दावेदारी खोल दी गई है।

Posted By: Nancy Bajpai

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