मुंबई, आइएएनएस। महाराष्ट्र सरकार भी यलगार परिषद-भीमा-कोरेगांव मामले की समानांतर जांच करेगी। इसके लिए सरकार जल्द ही विशेष जांच दल (SIT) का गठन करेगी।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रवक्ता और प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख जल्द ही इस संबंध में फैसला लेंगे। चार दिन पहले ही पुणे की सत्र अदालत ने यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हवाले किया है। यह कदम तब उठाया गया जब राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा था कि केंद्र ने यह जांच एनआइए को इसलिए सौंपी है क्योंकि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार कुछ छिपाना चाहती थी। जिस समय भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई थी उस वक्त देवेंद्र फड़नवीस सरकार सत्ता में थी।

शरद पवार यह कहकर दो बार मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साध चुके हैं कि एनआइए को जांच सौंपना अनुचित था, लेकिन शिवसेना ने अभी तक उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। हालांकि पवार का यह भी कहना था कि मुख्यमंत्री ने अपनी विवेकाधीन शक्तियों का ही इस्तेमाल किया है और मामले की जांच करना केंद्र सरकार का विशेषाधिकार था, लेकिन महाविकास अघाड़ी सरकार को विश्वास में लिया जाना चाहिए था।

मालूम हो कि यलगार परिषद- भीमा-कोरेगांव मामला केंद्र सरकार और महाराष्ट्र के बीच विवाद की वजह बना हुआ है और इसने पिछले तीन हफ्तों से राज्य में सत्तारूढ़ शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के बीच भी जबर्दस्त मनमुटाव पैदा किया हुआ है। दरअसल, इस मामले ने तब तूल पकड़ा था जब शरद पवार ने पिछले महीने राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर मामले में पुणे पुलिस की भूमिका की अलग से जांच कराने की मांग की थी। इसके दो ही दिन बाद केंद्र ने यह मामला एनआइए को सौंपने की घोषणा कर दी थी।

Posted By: Dhyanendra Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस