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OBC Reservation: महाराष्ट्र निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर बीजेपी का हल्ला-बोल, सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन

OBC Reservation in Maharashtra Civic election भाजपा नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया है कि ओबीसी का आरक्षण ना मिले इसलिए उद्धव सरकार ने यह चाल चली है। कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार का विरोध करने के लिए प्रदर्शन किया।

By Mahen KhannaEdited By: Published: Wed, 25 May 2022 12:27 PM (IST)Updated: Wed, 25 May 2022 04:58 PM (IST)
ओबीसी आरक्षण को लेकर बीजेपी का प्रदर्शन। (फोटो-एएनआइ)

मुंबई, एएनआइ। महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था बिना लागू किए निकाय चुनाव कराने को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने आज सरकार के खिलाफ हल्ला बोला है। भाजपा नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया है कि ओबीसी का आरक्षण ना मिले इसलिए उद्धव सरकार ने यह चाल चली है। कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार का विरोध करने के लिए प्रदर्शन किया।

बता दें कि महाराष्ट्र में निकाय चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चुनाव आयोग बिना आरक्षण के ही अब नगर निकाय चुनाव कराने की तैयारी शुरू कर चुका है। हालांकि आयोग ने साफ किया है कि 13 महानगर पालिका के लिए आरक्षण की प्रक्रिया 27 मई से की जाएगी।

MAHARASTRA OBC RESERVATION: महाराष्ट्र में ओबीसी (OBC) आरक्षण को लेकर भाजपा का हल्ला बोल

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महाराष्ट्र इकाई ने स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षण को बहाल करने की मांग को लेकर राज्य भर में चक्का जाम किया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में महाविकास अघाडी (एमवीए) सरकार की अक्षमता ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को स्थानीय निकाय में आरक्षण से वंचित कर दिया। बुधवार को नागपुर में पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ओबीसी कोटा पर कोई ध्यान नहीं दिया है। महाराष्ट्र सरकार वह नहीं कर पाई है जो मध्यप्रदेश (एमपी) ने किया है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 12 दिसंबर, 2019 को शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस सरकार से कहा था कि वह यह स्थापित करने के लिए आवश्यक तिहरी जांच पूरी करे कि ओबीसी को स्थानीय सरकारी निकायों में कोटा दिया जाना चाहिए।

जानिए क्या है पूरा मामला

भाजपा-शिवसेना सरकार ने 2019 में स्थानीय निकायों में ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण दिया था। लेकिन उच्चतम न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र में संबंधित स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं ओबीसी के लिए आरक्षित कुल सीटों के 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता। जिसके चलते शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम 1961 के भाग 12 (2)(सी) की व्याख्या करते हुए ओबीसी के लिए संबंधित स्थानीय निकायों में सीटों का आरक्षण प्रदान करने की सीमा से संबंधित राज्य चुनाव आयोग द्वारा वर्ष 2018 और 2020 में जारी अधिसूचनाओं को रद कर दिया था। भाजपा का आरोप है कि एमवीए सरकार की निष्क्रियता के कारण यह आरक्षण रद हुआ है।


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