नई दिल्ली (जेएनएन)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच हेलसिंकी में 16 जुलाई को होने जा रही पहली पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं। तमाम देशों के शासनाध्यक्ष तक यह जानना चाहते हैं कि आखिर इन दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के नेता किन मुद्दों पर बात करेंगे। क्या उनके एजेंडे पर सीरिया में चल रहा युद्ध होगा या फिर उनकी वार्ता अमेरिका में गत राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के इर्द-गिर्द होगी? अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान आर बोल्टन ने अनुमान लगाया है कि दोनों नेताओं की बातचीत से एक नई नाभिकीय संधि की रूपरेखा उभर सकती है।

आइए जानते हैं कि इस पर आखिर क्यों दुनिया की निगाह लगी हुई है।

हथियारों की होड़ का मसला

दोनों नेता अपने-अपने देश की ताकत को लेकर एक-दूसरे को आंखें दिखाते रहे हैं। ट्रंप ने पिछले दिनों एक समाचार एजेंसी से कहा था कि अगर दूसरे देश नाभिकीय हथियार हासिल करना चाहते हैं तो हम भी यह सुनिश्चित करेंगे कि हम इस समूह में सबसे ऊपर हों। पुतिन ने हाल के समय में एक के बाद एक नाभिकीय हथियारों का प्रदर्शन किया है और पश्चिमी देशों को आगाह किया है कि उन्हें बदली हुई जमीनी हकीकत समझनी होगी। इसी सिलसिले में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने यह राय व्यक्त की है कि इस बैठक से नई स्टार्ट नाभिकीय संधि की रूपरेखा उभर सकती है। मौजूदा स्टार्ट संधि 2021 में समाप्त हो रही है। यह संधि फरवरी 2011 में अस्तित्व में आई थी और इससे मास्को और वाशिंगटन को एक-दूसरे के नाभिकीय कार्यक्रम पर अंकुश रखने में मदद मिली थी।

पाबंदियों से राहत का सवाल

यूक्रेन के मसले को लेकर अमेरिका ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं। अमेरिका सीरिया युद्ध में रूस की भूमिका से भी नाखुश है। दोनों देशों के बीच तल्खी अमेरिका के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित दखल को हद से अधिक बढ़ गई है। अमेरिका में 2017 का एक कानून है जो ट्रंप को अपने दम पर तमाम प्रतिबंधों से राहत देने की इजाजत नहीं देता। इस कानून के मुताबिक ट्रंप कांग्रेस की अनुमति के बिना यह काम नहीं कर सकते। फिर भी वह इस के जरिये यह संकेत तो दे ही सकते हैं कि अमेरिका रूस पर पाबंदियों का दायरा बढ़ाने या उन्हें और कड़ा करने के मूड में नहीं है।

सीरिया का संघर्ष

इजरायल की चिंता सीरिया में लड़ाई अब अंतिम दौर में है। इसको लेकर इजरायल की चिंता यह है कि उसकी सीमाओं पर ईरानी सैन्य बलों की मौजूदगी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप में पुतिन से यह कहेंगे कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इजरायली सीमाओं से ईरानी सैन्य बलों की मौजूदगी को खत्म कराएं। माना जा रहा है कि पुतिन के लिए यह कठिन मुद्दा होगा।

राजनयिक विवाद

दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को अपने यहां से निष्कासित करने का मुद्दा तनाव का एक बड़ा विषय है। पहले वाशिंगटन ने अपने यहां से रूसी राजनयिकों को अमेरिकी चुनाव में दखल के मुद्दे पर निकाला और फिर रूस ने इसका जवाब ब्रिटेन में नव एजेंट के मामले में पश्चिमी देशों के राजनयिकों को निकालकर दिया। अगर इस बैठक में राजनयिकों की बहाली का निर्णय लिया जाता है तो यह एक बड़ा कदम होगा। हालांकि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह इतना आसान नहीं होगा। दोनों राष्ट्रपतियों के लिए घरेलू चुनौतियां कम नहीं हैं। इस स्थिति में उनके लिए अपने फैसले से बदलना कतई आसान नहीं होगा। जो भी हो, ट्रंप और पुतिन की मुलाकात विश्व के समीकरणों पर गहरा असर डालेगी, यह पूरी तरह तय है।

By Nancy Bajpai