मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडुगे ने लोकपाल चयन समिति की बैठक में एक बार फिर शामिल होने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मोदी सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है। विशेष आमंत्रित सदस्य के रुप में बैठक में शामिल होने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए खड़गे ने कहा कि बिना किसी कानूनी अधिकार के इसमें शरीक होने का कोई औचित्य नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर खड़गे ने बैठक में शामिल नहीं होने के अपने रुख से अवगत करा दिया। फरवरी 2018 के बाद यह सातवां मौका है जब खड़गे ने विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बैठक में शामिल होने का प्रस्ताव ठुकराया है। लोकपाल कानून के मौजूदा प्रावधान में नेता विपक्ष के बतौर सदस्य शामिल होने की व्यवस्था है। लोकपाल चयन समिति की शुक्रवार की बैठक का खड़गे ने इन्हीं तर्को के साथ बहिष्कार किया।

मौजूदा लोकसभा में सीटों की संख्या कम होने के कारण कांग्रेस को विपक्ष का आधिकारिक दर्जा हासिल नहीं है। इसीलिए लोकपाल चयन के प्रावधान में नेता विपक्ष की जगह लोकसभा में विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता को सदस्य बनाने संबंधी संशोधन की विपक्ष मांग करता रहा है। सीबीआई निदेशक की नियुक्ति संबंधी बिल में इस प्रावधान का संशोधन तो सरकार ने कर दिया मगर लोकपाल नियुक्ति को लेकर बदलाव नहीं हुआ।

खड़गे ने पीएम से कहा है कि सरकार के मंत्री जान बूझकर बैठक में उनके नहीं शामिल होने को लोकपाल नियुक्ति में देरी का दुष्प्रचार करते रहे हैं। जबकि हकीकत में सरकार ने लोकपाल चयन को लेकर अब तक जो भी कदम उठाए हैं, वह सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों की वजह से है। उनके मुताबिक विपक्ष को अलग-थलग किए जाने से पूरी चयन प्रक्रिया ही दूषित हो गई है। इसीलिए ऐसी किसी प्रक्रिया का वे हिस्सा नहीं बनना चाहते। खड़गे ने कहा कि विशेष आमंत्रित सदस्य का कोई कानूनी अधिकार नहीं और इसे साफ है कि विपक्ष की आवाज बेहद संवेदनशील मसले पर दबाई जा रही है।

 

Posted By: Sachin Bajpai

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