कोझिकोड(केरल), एएनआइ। सांसद वीरेंद्र कुमार, राज्यसभा सांसद और प्रमुख मलयालम दैनिक मातृभूमि के प्रबंध निदेशक का गुरुवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमार का अंतिम संस्कार शुक्रवार को वायनाड में होगा।

कुमार की पत्नी उषा और बच्चे - आशा, निशा, जयलक्ष्मी और एम.वी. श्रेयस कुमार हैं। उनका जन्म 22 जुलाई 1936 को वायनाड के कलपेट्टा में समाजवादी पार्टी के एक नेता मरुदेवी अवा और पद्मप्रभा गौड़ के यहां हुआ था। आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।

1987-91 के दौरान, कुमार केरल विधानसभा के सदस्य चुने गए। 1996 में, वह कोझिकोड निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए और श्रम और बाद में वित्त के लिए राज्य मंत्री (MoS) के रूप में कार्य किया।

पीएम मोदी ने आरएस सदस्य की मौत पर शोक व्यक्त किया

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य और प्रमुख मलयालम दैनिक मातृभूमि के प्रबंध निदेशक एम पी वीरेंद्र कुमार की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह गरीबों और वंचितों को आवाज देने में विश्वास करते थे। मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि मैं राज्यसभा सदस्य एम पी वीरेंद्र कुमार जी के निधन से दु:खी हूं। मोदी ने कहा, 'मैं उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति।' वीरेंद्र कुमार 1987 में केरल विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। वह दो बार लोकसभा के लिए भी निर्वाचित हुए थे।

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने शुक्रवार को कहा कि एम पी वीरेंद्र कुमार का निधन राजनीति और पत्रकारिता जगत को बड़ा नुकसान है। वीरेंद्र कुमार प्रमुख मलयाली दैनिक मातृभूमि के प्रबंध निदेशक और पीटीआई निदेशक मंडल के सदस्य थे। मलयाली लेखक-पत्रकार और राज्यसभा सदस्य एमपी वीरेंद्र कुमार का बृहस्पतिवार को कोझीकोड में दिल का दौरा पड़ने से एक निजी अस्पाताल में निधन हो गया है। वह 84 वर्ष के थे।

प्रकाश जावडेकर ने ट्वीट किया, ‘एम पी वीरेंद्र कुमार एक विद्वान राजनीतिज्ञ, समाजवादी, लेखक और पत्रकार थे। केंद्रीय श्रम मंत्री के रूप में वह श्रमिकों के कल्याण के लिये खड़े रहे। मातृभूमि के सीएमडी के रूप में उन्होंने सुनिश्चित किया कि यह लोगों की आवाज बने। उनके निधन से राजनीति और पत्रकारिता जगत को बड़ा नुकसान हुआ है।’

गौरतलब है कि वीरेंद्र कुमार मार्च 2018 में केरल से राज्यसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए थे। उन्हें वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) का समर्थन हासिल था। वे समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के तीन बार अध्यक्ष (चेयरमैन) रह चुके थे और निधन के समय बोर्ड में एक निदेशक थे।

Posted By: Nitin Arora

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