नई दिल्‍ली, एएनआइ। केरल में बारिश और बाढ़ से बिगड़े हालात को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्‍त तक मुल्‍लापेरियार बांध में पानी के स्‍तर को 139.99 तक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी। मुल्‍लापेरियार बांध केरल में है और उसका प्रबंधन तमिलनाडु के जिम्‍मे है। इससे जलस्‍तर को लेकर हमेशा दोनों राज्‍यों में विवाद बना रहता है।

केरल में आई त्रासदी की वजहों में केरल सरकार ने तमिलनाडु सरकार की तरफ से मुल्लापेरियार बांध में जल का स्तर कम करने से इन्‍कार करने और बाद अचानक पानी छोड़ना एक प्रमुख कारण बताया है। केरल में सदी की सबसे बड़ी बाढ़ के चलते अब तक 350 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट में केरल सरकार की तरफ से दाखिल हलफननामे में कहा गया है कि मुल्लापेरियार बांध में जल का स्तर बढ़ जाने के बाद अचानक पानी छोड़े जाने की वजह से यह बाढ़ आई है। हलफनामे में कहा गया है कि तमिलनाडु सरकार से अनुरोध किया गया कि 139 फीट तक धीरे-धीरे पानी छोड़ा जाए लेकिन अनुरोध के बावजूद तमिलनाडु सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला। फिर अचानक ही मुल्लापेरियार बांध से पानी छोड़े जाने से केरल सरकार को इडुक्की जलाशय से अधिक पानी छोड़ने के लिये बाध्य होना पड़ा, जो इस बाढ़ का एक प्रमुख कारण है।

केरल सरकार ने न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा कि इस बाढ़ से केरल की कुल करीब 3.48 करोड़ की आबादी में से 54 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

Posted By: Tilak Raj

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