मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जयपुर, राज्य ब्यूरो। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एवं लोकसभा चुनाव प्रदेश प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि भगोड़े नीरव मोदी को लंदन में सुरक्षित घूमता देख कांग्रेस खुश हो रही है, क्योंकि कांग्रेस और नीरव मोदी को बहुत पुराना रिश्ता है। उन्होने कहा कि देश को लूट कर भागने वालों को हमारी सरकार एक-एक कर वापस ला रही है, जबकि कांग्रेस सरकार में इन्हें संरक्षण मिलता था। इस मामले में कांग्रेस उल्टा चोर चौकीदार को डांटे वाली बात कर रही है।

जयपुर में भाजपा मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान जावडेकर ने कहा कि 13 सितम्बर, 2013 को दिल्ली में राहुल गाँधी नीरव मोदी के एक कार्यक्रम में शिरकत की थी और उसके दूसरे ही दिन नीरव मोदी को इलाहबाद बैंक से 1550 करोड़ का लोन मिल गया था। इसी तरह विजय माल्या को पूरा संरक्षण देने वाली भी कांग्रेस पार्टी ही है। माल्या पर पहले से ही 1457 करोड़ रूपये बकाया था, उसके बाद भी कांग्रेस के समय में स्टेट बैंक ने 1500 करोड़ रूपये का लोन और दे दिया।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने किंगफिशर एयरलाइन्स को बचाने का तर्क देकर विजय माल्या को फायदा पहुँचाया और सदन के बाहर तथा अंदर विजय माल्या की वकालत की। जावडेकर ने कहा कि 2008 में कांग्रेस की दूसरी पारी की शुरूआत मे बैंकों का कर्ज 15 लाख करोड था जो पांच साल में बढ कर 52 लाख करोड हो गया। सभी चोरों को कांग्रेस ने खुल कर कर्ज दिए और फोन पर लोन मंजूर करने का नया युग आया।

नीरव मोदी का पंजाब नेशनल बैक का धोटाला कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुआ। कांग्रेस ने लगातार उसकी मदद की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में चोर भागते नहीं थे, मोदी सरकार आने के बाद चोर डरकर भाग रहे है और उल्टा चोर चैकीदार को डाँट रहा है। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी और मेहुल चैकसी का राहुल गाँधी से क्या सम्बन्ध है, यह स्पष्ट होना चाहिए। कांग्रेस वाले खुद लूट करते है और लूटने वालों को सहयोग करते है।

जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस सरकार में देश को लूटने वाले भगौड़े खुलेआम देश में ही घूम रहे थे, लेकिन भाजपा की सरकार आते ही भगौड़े देश से भाग छूटे। देश को लूटने वाले इन भगौड़ों को मोदी सरकार ढूँढ़-ढूँढ़ कर देश में वापस लाकर न्यायालय के समक्ष पेश कर रही है। इनमें अगस्ता वेस्टलैंड मामले में माइकल मिशेल, राजीव सक्सैना और दीपक तलवार को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा चुका है।

विजय माल्या जल्द ही भारत आने वाला है और नीरव मोदी का प्रत्यर्पण कराने के लिए भी हमने इंग्लैंड सरकार से बात की है। जावडेकर ने कहा कि भगौड़े अपराधियों को पकड़ने के लिए मोदी सरकार ने एक कानून बनाया हैं। इस कानून के तहत भगौड़ों की सहायता करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि पीएनबी घोटाले के खुलासे के एक दिन के भीतर ही ईडी 11,400 करोड़ रूपए के घोटाले की आधी रकम लगभग 5100 करोड़ रूपये की संपत्ति जब्त करने में सफल रहा है।

ईडी ने घोटाले का पता चलने के एक सप्ताह में ही नीरव मोदी से जुड़े 35 और ठिकानों पर कार्रवाई की, जिसमें 549 करोड़ रूपये की रकम जब्त की गई। जनवरी में ईडी ने थाईलैण्ड में नीरव मोदी की 13.14 करोड़ की संपत्ति सील कर दी है। ईडी ने प्रिवेंशन आॅफ मनी लाॅन्ड्रिंग (पीएलएलए) कोर्ट में नीरव के खिलाफ आर्थिक भगौड़ा अपराधी कानून-2018 के तहत भगौड़ा घोषित करने की अर्जी लगा रखी है।

वीरांगना ने दिया बेटे को जन्म

पुलवामा हमले के तीन दिन बाद ही आंतकियों से मुठभेड में शहीद होने वाले राजस्थान के वीर जवान श्योराम गुर्जर के आंगन में शुक्रवार रात को किलकारियां गूंज उठी। शहीद की वीरंगाना ने पुत्र को जन्म दिया है। शहीद श्योराम गुर्जर पुलवामा के पिंगलाना में आंतकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। शहादत के 17 दिन बाद शहीद के आंगन में खुशियों महक उठीं। जिस वक्त श्योराम गुर्जर आंतिकयों से भिड़ रहे थे तब उनकी पत्नी गर्भवती थी। शहीद के भाई रूपचंद ने बताया कि वीरांगना सुनीता के प्रसव पीड़ा होने पर उसे पहले राजकीय अजीत अस्पताल खेतड़ी लेकर आए. जहां से उसे जयपुर रैफर किया गया। मां और बच्चा स्वस्थ बताए जा रहे है।

भाइयों को फंसाने के लिए बाप ने बेटे की हत्या की

राजसथान के बांसवाडा में एक व्यक्ति बदले की आग में अपने सारे नाते रिश्ते भूल गया और जमीनी विवाद में अपने चचेरे भाइयों को फंसाने की नीयत से अपने ही बेटे की हत्या कर दी।

मामला 8 महीने पुराना है जिसका पुलिस ने आखिरकार शुक्रवार शाम खुलासा करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ हत्या सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इस घटनाक्रम का दर्दनाक पहलू यह है कि मृतक विक्रम मूक बंधिर व विकलांग भी था।

पुलिस के अनुसार 3 जुलाई 2018 को कांतिलाल नामक व्यक्ति ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दी कि 12 से 15 लोग उसके घर पर आ धमके और उसके 10 वर्षीय पुत्र विक्रम की जान लेने की नीयत से उस पर कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया। पुलिस को दी गई रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम दर्ज कराए गए उनमें सब उसके चचेरे भाई थे। करीब डेढ़ महीने बाद विक्रम की दम घुटने से संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई।

पुलिस ने प्राणघातक हमले सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया जिसमें कांतिलाल द्वारा आरोपित लोग निर्दोष पाए। जिला पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की। टीम ने प्रकरण से संबंधित एक-एक कड़ी को जोड़ा तो मृतक विक्रम के पिता कांतिलाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

आखिरकार पुलिस ने कांतिलाल को हिरासत में लिया और कड़ाई से पूछताछ की तो मामला साफ हो गया। पुलिस के अनुसार कांतिलाल का उसके चचेरे भाइयों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. और इस संबंध में कई मामले कोर्ट और पुलिस में भी चल रहे थे। कांतिलाल ने चचेरे भाइयों को फसाने की नीयत अपने ही पुत्र विक्रम पर कुल्हाड़ी से हमला किया और भाइयों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दे दी।

हालांकि उस दौरान विक्रम बच गया लेकिन डेढ़ महीने बाद कांतिलाल ने राज खुलने के डर से गला घोटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। थाना अधिकारी के अनुसार कांतिलाल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह है कि 10 वर्षीय विक्रम मूक बधिर होने के साथ विकलांग भी था। कांतिलाल उससे छुटकारा पाना चाहता था। इस हमले के जरिए कंतिलाल एक तीर से दो निशान साधना चाहता था।

जलाशयों को बचाने के लिए गम्भीर नहीं दिख रहे राजस्थान के कलेक्टर

राजस्थान का लगभग हर जिला पानी की किल्लत से परेशान है, इसके बावजूद राजस्थान के जिलों के कलक्टर अपने जिलों के जलाशयों को बचाने और संरक्षित करने के लिए गम्भीर नहीं दिख रहे है। इसी के चलते चार साल पहले इस बारे में लागू सख्त कानून के बावजूद महज आधा दर्जन जलाशयों का संरक्षण ही हो पाया है।

प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार के समय 21 मार्च 2015 को राजस्थान झील विकास प्राधिकरण विधेयक पारित किया गया और झीलों व जलाशयों के संरक्षण के लिए कानून लागू हो गया। इसी कानून के तहत स्वायत्त शासन सचिव की अध्यक्षता में राजस्थान झील विकास प्राधिकरण का गठन भी किया गया।

कानून कहता है कि ऐसा कोई जलाशय जिसका पिछले 50 वर्ष में कभी भी अस्तित्व रहा हो या ऐसा जलाशय जिसका डूब क्षेत्र पिछले 50 वर्षों में किसी भी समय न्यूनतम 10 हैक्टेयर से रहा हो या सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व के ऐसे जलाशय जिनका डूब क्षेत्र न्यूनतम 3 हैक्टेयर रहा हो उन सबके संरक्षण का काम किया जाना है।

राजस्थान झील विकास प्राधिकरण एक्ट के मुताबिक जिला कलक्टर्स इन सभी मापदंड को पूरा करने वाले जलाशयों को संरक्षित करने के प्रस्ताव झील विकास प्राधिकरण को भेजने के लिए बाध्य है। झील विकास प्राधिकरण की ओर से पिछले पौने तीन सालों में सभी जिला कलक्टर्स को आठ बार पत्र भेजे जा चुके है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

इन पत्रों में कहा गया है कि कानून की धारा 4 व 5 के मुताबिक, आप अपने जिले में स्थित जलाशयों के संरक्षण के लिए प्रस्ताव प्राधिकरणों को भिजवाएं। इन पत्रों में यह भी कहा गया है कि अगर निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाला कोई जलाशय आपके क्षेत्र में नहीं हैं तो इस बारे में प्रमाण पत्र भिजवाएं।

सिर्फ नौ जिलों से आया जवाब- झीलों के संरक्षण के लिए राजस्थान के जिला कलेक्टरो की गम्भीरता का आलम यह है कि 33 में से सिर्फ नौ जिलों ने पत्र का जवाब भेजा है और अब तक प्राधिकरण को सिर्फ आधे दर्जन झीलों के संरक्षण के प्रस्ताव मिले हैं। इनमें जयपुर की मानसागर झील, उदयपुर की आना सागर व फतेह सागर झील, अजमेर की आना सागर व गुंदोलाव झील और डूंगरपुर की गैप सागार झील शामिल है।

वहीं जालौर, सीकर, भरतपुर और श्रीगंगानगर के कलेक्टरों ने प्रमाणित किया कि उनके इलाके में संरक्षण के लायक कोई भी जलाशय नहीं हैं। इस प्रकार प्राधिकरण के पत्रों पर रेस्पोंस केवल 9 कलेक्टरों ने दिया, जबकि राजस्थान के ज्यादातर जिलों में ऐसे जलाशय है जो कानून द्वारा निर्धारित मापदण्ड पूरे करते हैं और इनका संरक्षण का काम किया जाए तो उन जिलों में न सिर्फ पेजयल की समस्या का समाधान हो सकता है, बल्कि पर्यटन बढाने में भी सहायता मिल सकती है।

Posted By: Bhupendra Singh

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