क्या ममता बनर्जी की अपनी पार्टी पर कमजोर हो रही पकड़; 'फर्जी हस्ताक्षर' विवाद से तृणमूल कांग्रेस में भारी उथल-पुथल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली भारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब एक नए विवाद में फंस गई ...और पढ़ें

'फर्जी हस्ताक्षर' विवाद से तृणमूल कांग्रेस में भारी उथल-पुथल (फोटो- ममता बनर्जी, क्रेडिट- पीटीआई)
HighLights
सीएम शुभेंदु ने आरोप लगाया कि कई हस्ताक्षर फर्जी हैं
इस मामले में बंगाल की आपराधिक जांच विभाग सक्रिय हो गई है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली भारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब एक नए विवाद में फंस गई है। 'फर्जी हस्ताक्षर' कांड ने पार्टी में गहरे आंतरिक संकट को जन्म दे दिया है।
दो विधायकों संदीपान साहा और ऋतब्रता बनर्जी ने विधानसभा सचिवालय में शिकायत दर्ज कराकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे जाहिर होता है कि ममता बनर्जी की अपनी पार्टी पर पकड़ कमजोर हो रही है।
विवाद की जड़
ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने 9 मई को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में प्रस्तावित किया।
इस पत्र के साथ 70 विधायकों के हस्ताक्षर बताए गए। बाद में सत्तारूढ़ भाजपा नेता और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि इन हस्ताक्षरों में से कई फर्जी हैं।
उन्होंने दावा कि
या कि कई नाम बड़े अक्षरों (कैपिटल लेटर्स) में लिखे गए थे, जो संदिग्ध है। दोनों शिकायतकर्ता विधायकों ने कहा कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक हुई ही नहीं जिसमें विपक्ष के नेता के चयन का प्रस्ताव पास किया गया हो। उन्होंने इसे पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी बताया।
जांच और कार्रवाई
इस मामले में राज्य की आपराधिक जांच विभाग सक्रिय हो गई है। अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सीआईडी ने कई टीएमसी विधायकों के बयान दर्ज किए हैं और हस्ताक्षर विशेषज्ञों की मदद से सत्यापन कराया है। कुछ विधायकों (जैसे अरूप रॉय, बहारुल इस्लाम और सुभाषिश दास) ने जांच में बताया कि उनके नाम पर लगे हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
पार्टी की सख्ती
विवाद सार्वजनिक होते ही टीएमसी ने तेजी से एक्शन लिया। दोनों शिकायतकर्ता विधायकों- ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा- को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तुरंत निष्कासित कर दिया गया। पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
मौजूदा हालात
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी पिछले एक दशक में अपनी सबसे बुरी चुनावी हार से उबरने की कोशिश कर रही है। 'साइनगेट' कांड ने पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष और गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया है। अब देखना यह है कि यह संकट पार्टी की एकजुटता को और कितना कमजोर करता है।
