जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत के साथ अमेरिका के हित में व्यापार समझौते को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कितने इच्छुक हैं इसका अंदाजा पिछले दिनों उनके कई बयानों से लगता रहा है। कश्मीर, सीएए जैसे मुद्दों पर भी बातचीत का संदेश देकर दबाव बनाने की रणनीति भी हो रही है। लेकिन भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का मत है कि किसी भी प्रकार की व्यापार वार्ता में भारत का हित सर्वोपरि होगा। इससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

वाणिज्य मंत्रालय का साफ मानना है कि रीजनल को-ऑपरेशन इन इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसेप) की तरह ही अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के दौरान भी हमारा रुख रहेगा। भारत का बाजार दूसरों के लिए खोलने के मामले में कूटनीति नहीं बल्कि व्यापारिक हित आधार होगा। खुद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी दो दिन पहले इसका संकेत दे चुके हैं।भारत से अमेरिका को सालाना 52 अरब डॉलर का निर्यात होता है जबकि अमेरिका से भारत को सालाना लगभग 34 अरब डॉलर का निर्यात होता है। भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका है जहां भारत अपना 16 फीसद निर्यात करता है। भारत 17.8 फीसद निर्यात यूरोपीय यूनियन को करता है।

सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी शराब जिम बीम को भारतीय बाजार में सस्ता करने का दबाव दिया जा रहा है। अभी जिम बीम शराब पर भारतीय बाजार में 150 फीसद शुल्क लगता है। अमेरिका इस शुल्क को कम से कम स्तर पर लाना चाहता है कि ताकि भारतीय बाजार में वह दूसरी मध्यम दर्जे की शराब के साथ प्रतिस्पर्धा में आ सके। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (सीआइएबीसी) के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका पहले से ही भारत में 1900 करोड़ रुपये का अल्कोहल बेचता है, जबकि भारत से अमेरिका को मात्र 50 करोड़ रुपये का अल्कोहल जाता है।

सीआइएबीसी के महानिदेशक विनोद गिरी ने बताया कि उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को पत्र लिखकर जिम बीम के लिए टैरिफ कम नहीं करने की मांग की है। अगर जिम बीम के लिए टैरिफ कम किया जाता है तो इसका फायदा अन्य देशों की शराब को भी होगा, जिससे भारत में बनने वाली शराब की बिक्री प्रभावित होगी।

अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा कारोबार सहयोगी

चीन को पछाड़कर अमेरिका कारोबार के मामले में भारत का सबसे बड़ा सहयोगी बन गया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 में अमेरिका-भारत का द्विपक्षीय कारोबार 87.95 अरब डॉलर रहा। इस अवधि में चीन के साथ 87.07 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में भी अमेरिका आगे बना हुआ है। अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत-अमेरिका कारोबार 68 अरब डॉलर का रहा। इस दौरान चीन से 64.96 अरब डॉलर का कारोबार हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका जिस तरह से द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, उससे आने वाले वर्षो में भी यह ट्रेंड बने रहने की उम्मीद है।अमेरिका उन कुछ देशों में शामिल है, जिनके साथ भारत ट्रेड सरप्लस की स्थिति में है। अर्थात भारत आयात के मुकाबले अमेरिका को निर्यात ज्यादा करता है। वित्त वर्ष 2018-19 में अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस 16.85 अरब डॉलर रहा था। इसी दौरान चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा 53.56 अरब डॉलर था।

Posted By: Shashank Pandey

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