डा. लक्ष्मी शंकर यादव। India China Tension चीन के अड़ियल रुख के कारण 13वें दौर की कोर कमांडर वार्ता में एक बार फिर लंबित मामलों का कोई समाधान नहीं निकाला जा सका। इस बीच भारतीय पक्ष ने पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 समेत पांच स्थलों से सैनिकों की वापसी की रुकी हुई प्रक्रिया और देपसांग से जुड़े मामले वार्ता में उठाए, लेकिन चीनी पक्ष इससे सहमत नहीं हो सका और आगे बढ़ने की दिशा में कोई प्रस्ताव भी नहीं दे सका। दरअसल इस वार्ता में भारत ने साफ कर दिया था कि तनाव खत्म करने के लिए सभी जगहों पर पूरी तरह से सैनिकों की वापसी होनी चाहिए।

भारत ने हाट स्प्रिंग इलाके से लेकर देपसांग और डेमचोक से चीन को वापस जाने को कहा, मगर चीन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि तनातनी का दौर अभी जारी रहेगा। दरअसल दोनों देशों के बीच हाल में हुई कोर कमांडर वार्ता से पहले ही चीन की हरकतों ने यह संदेश दे दिया था कि वह एलएसी पर तनाव खत्म करना नहीं चाहता है।

इस वार्ता से एक सप्ताह पहले अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारतीय इलाके में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिश के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच नोकझोंक हुई, लेकिन कमांडरों ने बातचीत करके टकराव को टाल दिया था। कुल मिलाकर सीमा विवाद को लेकर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक तरफ वह वार्ता का नाटक करता है, जबकि दूसरी तरफ अपनी ओर से घुसपैठ की घटनाओं को भी अंजाम देता है। घुसपैठ की एक हालिया घटना उत्तराखंड के बाराहोती सेक्टर से लगी सीमा की है। बीते दिनों इस इलाके में चीन के करीब 100 सैनिक एलएसी को पार करके पांच किमी अंदर तक घुस आए और करीब तीन घंटे तक वहां रहे। ये चीनी सैनिक घोड़ों पर सवार होकर इस इलाके में आए और लौटने से पहले एक पुल तथा कुछ अन्य आधारभूत ढांचे को भी तोड़ गए।

घुसपैठ की इन खबरों के बाद खुफिया एजेंसियां और प्रशासनिक अमला अलर्ट हो गया है। वैसे पहले भी चमोली जिले के बाराहोती स्थित ‘नो मैंस लैंड’ में चीनी सैनिकों के घुसपैठ की खबरें आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला अत्यंत गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि चीनी सैनिक इस इलाके में आए, घूमे, सिगरेट और अन्य चीनी सामानों के रैपर भी फेक गए। यह भी उल्लेखनीय है कि बाराहोती में एक ऐसा चारागाह है जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। यह चारागाह 60 वर्ग किमी इलाके में फैला हुआ है जिसमें दोनों देशों के चरवाहे समय-समय पर आते जाते रहते हैं। फिलहाल इस इलाके में पेट्रोलिंग नहीं की जाती है। वैसे स्थानीय प्रशासन की टीमें समय-समय पर इस क्षेत्र का मुआयना करती रहती हैं। इस इलाके में पिछले कुछ दशकों से दोनों देशों के बीच यह नीति चली आ रही है कि पेट्रोलिंग की कोई टीम वहां नहीं जाएगी। दोनों देशों के बीच यहां पर सीमाओं के रेखांकन को लेकर अस्पष्टता है जिसके चलते अक्सर इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।

बाराहोती की इस घटना से कुछ दिन पहले ये खबरें आई थीं कि चीन ने लद्दाख सीमा के नजदीक अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ा दी है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पूर्वी लद्दाख के सामने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास करीब आठ सामरिक स्थानों पर लगभग 80 नए अस्थायी सैन्य शिविर तैयार कर दिए हैं। गत वर्ष अप्रैल-मई में भारत-चीन के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद चीन ने अनेक सैन्य शिविरों का निर्माण किया है। ये शिविर पुराने शिविरों के अलावा तैयार किए गए हैं। चीन की सेना पीएलए ने उत्तर में कराकोरम के नजदीक वहाब जिल्गा से लेकर हाट स्पिं्रग, चांग ला, ताशिगांग, मांजा और चुरुप तक अपने सैनिकों के लिए अनेक अस्थायी शिविर बना लिए हैं। इन गतिविधियों से स्पष्ट होता है कि सीमा के नजदीक से अपनी फौज हटाने का उसका कोई इरादा नहीं है।

गलवन घाटी में चीन ने जानबूझ कर भारतीय सैनिकों को निशाना बनाया था। इसलिए यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि अब चीन की किसी भी गतिविधि को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। हालांकि भारत ने लद्दाख इलाके में चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी करते हुए तोपों, टैंकों व लड़ाकू विमानों की तैनाती कर रखी है।

चीन की बढ़ती हरकतों के पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए अपने सीमाई इलाकों में सड़कों सहित अन्य सुविधाओं का विकास तेजी से कर रखा है। इधर हाल के दिनों में ‘क्वाड’ के तहत अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान एवं भारत की चीन के खिलाफ बढ़ती सक्रियता ने भी चीन को परेशानी में डाल रखा है। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी भारत की भूमिका क्वाड में काफी बढ़ गई है जिससे चीन तिलमिला रहा है। कुल मिलाकर चीन की विस्तारवादी नीति और हाल के दिनों में क्वाड व आकस जैसे संगठनों के माध्यम से उसके खिलाफ बने माहौल से उसकी नींद उड़ी हुई है। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख द्वारा कही गई इस बात में काफी दम है कि जब तक दोनों देशों के बीच सीमा समझौता नहीं हो जाता, तब तक सीमा पर छिटपुट घटनाएं होती रहेंगी। दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कह दिया है कि यदि कोई ताकत भारत की एक इंच भूमि पर कब्जा करने की कोशिश करेगी तो भारतीय सेना उसे मुंहतोड़ जवाब देगी।

अभी तक दोनों सेनाओं के मध्य 13 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन विवाद पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, हाट स्प्रिंग इलाके में अभी तनाव बना हुआ है। इसीलिए भारतीय सेना यहां पर पूरी तरह से मुस्तैद है और किसी भी चुनौती का पूरी तरह से मुकाबला करने की तैयारी में जुटी हुई है। ऐसे में टकराव बढ़ाने के बजाय चीन को वार्ता के जरिये सभी विवाद जल्द सुलझाने चाहिए।

[पूर्व प्राध्यापक, सैन्य विज्ञान विषय]

Edited By: Sanjay Pokhriyal