नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। शिक्षण संस्थानों का काम छात्रों को शिक्षा देना है। इनका राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। स्वायत्त संस्थानों को राजनीति का अड्डा नहीं बनने दिया जा सकता है। जेएनयू में रविवार शाम हुए हमलों और उसके बाद की राजनीति पर मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यह बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालय में हिंसा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की बात भी कही। इससे पहले मानव संसाधन मंत्रालय ने जेएनयू के आला अधिकारियों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली। गृह मंत्री अमित शाह भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने साफ किया है कि विश्वविद्यालय के भीतर हिंसा की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती है। हिंसा के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।

एलजी ने की जेएनयू वीसी से मुलाकात

जेएनयू में रविवार शाम कुछ नकाबपोश लोगों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था। हिंसा की खबर आते ही गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक और उप राज्यपाल अनिल बैजल से बात की थी। शाह ने उप राज्यपाल को जेएनयू के सभी पक्षों से बातचीत कर विश्वविद्यालय के भीतर चल रहे टकराव के कारणों को समझने और उनका स्थायी समाधान निकालने की कोशिश करने को कहा। इस सिलसिले में अनिल बैजल ने जेएनयू के उप कुलपति एम जगदीश कुमार से मुलाकात कर हालात के बारे में उनसे जानकारी ली।

जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा

इसके पहले अमित शाह ने रविवार की शाम को ही दिल्ली पुलिस आयुक्त को फोन पर जेएनयू में तत्काल शांति स्थापित करने के लिए जरूरी कदम उठाने और मामले की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया था। जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए शाह ने साफ कर दिया था कि संयुक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी की निगरानी में ही इसकी जांच होनी चाहिए। इसके साथ उन्होंने दिल्ली पुलिस से पूरे मामले पर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा है। अमित शाह के तीखे तेवर का ही नतीजा है कि दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले की जांच क्राइम जांच को सौंप दी है।

रजिस्ट्रेशन से रोकना हिंसा की वजह

हिंसा छात्रों के आपसी गुटों के बीच हुई है। इसके मूल में रजिस्ट्रेशन से जुड़ा विवाद है। ज्यादातर छात्र रजिस्ट्रेशन करना चाहते थे, लेकिन फीस वृद्धि पर आंदोलित एक गुट उन्हें लगातार रोक रहा था। इसी विवाद में रविवार को हिंसा भड़क गई। मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से बुलाई गई बैठक में जेएनयू के आला अधिकारियों ने यह रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में फीस वृद्धि वापस लेने की जानकारी भी है।

जांच से ही सच आएगा सामने

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हिंसा पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। शुरुआती रिपोर्ट से साफ है कि हिंसा के मूल में जेएनयू में फीस बढ़ोतरी का विरोध है। विरोधी छात्र अन्य छात्रों को अगले सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराने दे रहे। अधिकारी ने कहा कि छात्रों के विरोध के अधिकार को सुनिश्चित रखते हुए आम छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाना भी अहम है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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