नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देश में एक तरफ राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है, वहीं पार्टियों में सदन के अंदर और बाहर आपसी तल्खी खुलकर सामने आ रही है। सबसे ज्यादा निशाने पर है भाजपा, जिसके खिलाफ विपक्षी पार्टियां महागठबंधन बनाने में जुटी हुई हैं। ऐसे में बजट सत्र की शुरूआत में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा संयुक्त सदन को दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव भी लटक गया है।

पार्टियों की आपसी खींचतान की वजह से राज्य सभा से धन्यवाद प्रस्ताव अब तक पास नहीं हुआ है। लिहाजा सरकार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को पारित कराने के लिए रास्ता तलाशने में जुटी हुई है। हालांकि सरकार के अब तक के सभी प्रयास नाकाम रहे हैं। मंगलवार को भी भारी हंगामे की वजह से राज्यसभा दोपहर में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। अब बुधवार को बजट सत्र का अंतिम दिन है। मतलब बुधवार को सरकार के पास राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास कराने का अंतिम मौका है।

अगर बुधवार को भी राज्य सभा से धन्यवाद प्रस्ताव पास नहीं हुआ तो सरकार के लिए बड़ी नाकामी साबित होगी। सरकार अब भी विपक्षी पार्टियों को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए संशोधन प्रस्तावों को वापस लेने के लिए मनाने में जुटी है। अगर ऐसा न हुआ तो सरकार ने विपक्ष के कुछ संशोधनों के साथ धन्यवाद प्रस्ताव को पास कराने का भी विकल्प खुला रखा है। इसके अलावा सरकार वर्ष 2004 में मनमोहन सरकार द्वारा अपनाए गए तरीके से भी प्रस्ताव पास करा सकती है। धन्यवाद प्रस्ताव पास होगा या नहीं, इस पर बुधवार को ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मालूम हो कि संसद के दोनों सदनों से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को पारित कराना आवश्यक है। इसके बाद इस संबंध में राष्ट्रपति भवन को भी सूचित किया जाता है। राष्ट्रपति ने 31 जनवरी को संसद में संयुक्त सत्र को संबोधित किया था। किसी भी संशोधन के पारित होने पर राष्ट्रपति के संबोधन में कोई बदलाव नहीं होगा। एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार धन्यवाद प्रस्ताव को पारित कराना आवश्यक है।

सरकार ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा कराते हुए इसे पास करा लिया है, लेकिन राज्यसभा में ये प्रस्ताव अभी अटका हुआ है। संसदीय मामलों के राज्यमंत्री विजय गोयल बिना किसी संशोधन के प्रस्ताव पारित कराने के लिए सभी दलों को मनाने में जुटे हैं। वहीं विपक्ष राफेल डील, रक्षा सौदा, नागरिकता संशोधन विधेयक और एससीएसटी नियुक्तियों को प्रभावित करने वाले आरक्षण बिल जैसे मामलों पर लगातार विरोध करते हुए राज्य सभा चलने नहीं दे रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार विपक्ष मोशन ऑफ थैंक्स पर चर्चा नहीं करने दे रहा है, क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में बोलने का अवसर नहीं देना चाहते हैं। राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के हस्तक्षेप के बावजूद सरकार और विपक्षी दलों के बीच गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। वह मोशन ऑफ थैंक्स को संवैधानिक प्राथमिकता बताते हुए विपक्ष से इसे पास करने का अनुरोध कर चुके हैं।

अब तक दो बार पास नहीं हुआ है मोशन ऑफ थैंक्स
इतिहास में अब तक केवल दो बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (मोशन ऑफ थैंक्स) सदन से पास नहीं हुआ है। इसके अलावा सदन में बिना किसी चर्चा के भी प्रस्ताव पारित होने का भी एक उदाहरण है। वर्ष 1991 में मोशन ऑफ थैंक्स इसलिए पास नहीं हो सका था क्योंकि उस वक्त के चंद्रशेखर सरकार ने इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद वर्ष 1996 में एक बार फिर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने महज 13 दिन के कार्यकाल के बाद इस्तीफा दे दिया था, इसलिए उस वक्त भी मोशन ऑफ थैंक्स पारित नहीं हो सका था। वर्ष 2004 में मनमोहन सिंह सरकार में ये प्रस्ताव बिना किसी चर्चा के दोनों सदनों से पास हो गया था, क्योंकि मौजूदा स्थिति की तरह उस वक्त भी दोनों सदनों में लगातार गतिरोध चलने की वजह से काम नहीं हो पा रहा था।

Posted By: Amit Singh