नई दिल्ली, प्रेट्र। सरकार यह बोलकर देश और सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर रही है कि तीनों कृषि कानूनों को पारित कराने से पहले विमर्श किया गया था। सरकार का यह झूठा दावा अदालत की अवमानना है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में यह बात कही।

सिंघवी ने कहा कि 22 दिसंबर को एक आरटीआइ के जवाब में सरकार ने कहा था कि इस बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं है। अब अचानक सरकार इन कानूनों को दो दशक की चर्चा का परिणाम बताने लगी है। उन्होंने कहा, 'यह गलतबयानी तथा देश, सुप्रीम कोर्ट एवं अन्य संबंधित पक्षों को गुमराह करने का स्पष्ट उदाहरण है।' सिंघवी ने सवाल किया क्या 20 साल पहले किसी कमेटी द्वारा की गई चर्चाओं को 2020 में कानून पास कराने के लिए प्री-लेजिस्लेटिव कंसल्टेशन माना जा सकता है? विधायी तौर पर अक्षमता को देखते हुए ही पिछली सरकारों ने केवल मॉडल लॉ बनाए और राज्यों को विकल्प दे दिया था। वे मॉडल कानून इन काले कृषि कानूनों से बहुत अलग थे।

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