जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी पर देश में हो रही राजनीति का एक दूसरा पहलू यह है कि शुल्क घटा कर जनता को राहत देने के कोई तैयार नहीं है। चुनाव सर पर आते देख राजस्थान और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने राज्यों की तरफ से लगाये जाने वाले शुल्कों में थोड़ी बहुत कटौती की है तो विपक्ष केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है। पर पेट्रोल -डीजल का अंकगणित बताता है कि राज्यों को ही आगे आना होगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड जितना ही महंगा हो रहा है इन राज्यों को शुल्कों से होने वाली कमाई उसी हिसाब से बढ़ रही है। पिछले चार वित्त वर्षो में पेट्रोल व डीजल पर स्थानीय शुल्क व केंद्रीय शुल्क में हिस्सेदारी से राज्यों को सीधे तौर पर 9,45,258 करोड़ रुपये की कमाई हुई है।

पेट्रोल व डीजल के महंगा होने से राज्यों को दोहरा फायदा
पेट्रोल व डीजल के महंगा होने से राज्यों को दोहरा फायदा होता है। एक तरफ ये सीधे शुल्क वसूलते हैं जबकि दूसरी तरफ केंद्र सरकार जो शुल्क वसूलती है उसका भी 42 फीसद हासिल करते हैं। अगर पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों पर ध्यान दे तो वर्ष 2014-15 से वर्ष 2017-18 के दौरान राज्यों को कुल 9,45,258 करोड़ रुपये मिले थे। इन्होंने सीधे तौर पर पेट्रोल व डीजल से 6,30,474 करोड़ रुपये वसूले थे जबकि केंद्र को प्राप्त 7,49,485 करोड़ रुपये के उत्पाद शुल्क में 42 फीसद यानी 3,14,784 करोड़ रुपये का हिस्सा भी इन्हें मिला था।

अधिकांश राज्य पेट्रोल व डीजल पर बिक्री कर घटाने को तैयार नहीं
बड़ी कमाई के बावजूद अधिकांश राज्य पेट्रोल व डीजल पर बिक्री कर घटाने को तैयार नहीं दिखते हैं। चुनाव सर पर देख राजस्थान व आंध्र प्रदेश की सरकारों ने पिछले दो दिनों के भीतर वैट घटा कर पेट्रोल व डीजल की महंगाई से जनता को थोड़ी राहत दी है। इनके अलावा पिछले चार वर्षो में सिर्फ चार राज्यों ने इस तरह के कदम उठाये हैं।

अगर सिर्फ दिल्ली की बात करें तो यहां पेट्रोल की कीमत सोमवार को 23 पैसे की बढ़ोतरी के बाद 80.73 प्रति लीटर हो गई है। इंडियन आयल के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी की रिफाइनरी से पेट्रोल पंप डीलर को दिल्ली में 40.45 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल दी गई है। इस पर 19.48 रुपये प्रति लीटर की दर से उत्पाद शुल्क केंद्र सरकार ने वसूला है। इसका 42 फीसद यानी 8.18 रुपये केंद्र सरकार दिल्ली को देगी। राज्य सरकार की तरफ से इस पर 17.16 रुपये का वैट वसूला गया है। यानी कर के रूप में वसूले गए कुल 36.64 रुपये में 25.34 रुपये दिल्ली के खाते में जाता है। और केंद्र के खाते में 11.30 पैसे।

पेट्रोल पर सबसे कम वैट की दर गोवा में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में
पेट्रोल पर सबसे कम वैट की दर 16.62 फीसद गोवा में है जबकि अधिकतम मुंबई (महाराष्ट्र) में 39.48 फीसद है। डीजल की भी यही स्थिति है। 13 राज्यों में वैट की दर 20 फीसद से ज्यादा है।

वर्ष 2015-16 में अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारत ने औसतन 46 डॉलर प्रति बैरल की दर से क्रूड खरीदा था जब राज्यों ने पेट्रोल व डीजल से 1,42,848 करोड़ रुपये की कमाई बतौर बिक्री कर (वैट) लगा कर की थी। अगर इसमें केंद्र की तरफ से संग्रह किये गये उत्पाद शुल्क (1,78,591 करोड़ रुपये) में 42 फीसद हिस्सेदारी जोड़ दें तो राज्यों को इन दोनो उत्पादों से कुल 2,17,856 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था।

वर्ष 2017-18 में भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से औसतन 56 डॉलर प्रति बैरल की दर से क्रूड खरीदा। और इस वर्ष राज्यों को पेट्रोल व डीजल से होने वाली कमाई की राशि बढ़ कर 2,80,278 करोड़ रुपये हो गई है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में भारत ने औसतन 72.8 डॉलर प्रति बैरल की दर से क्रूड खरीदा है ऐसे में राज्यों की कमाई और तेज बढ़ोतरी की गुंजाइश है।

Posted By: Bhupendra Singh