माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट इस महीने राजनैतिक और सामाजिक स्थिति पर दूरगामी असर डालने वाले करीब दर्जन भर फैसले सुनाएगा। जिसमें आधार, समलैंगिकता, व्याभिचार, एससी एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण और मस्जिद को नमाज के लिए इस्लाम का अभिन्न हिस्सा न मानने के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत के मामले शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को सेवानिवृत हो रहे उससे पहले आएंगे फैसले

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को सेवानिवृत हो रहे हैं ऐसे में उनके द्वारा सुने गए मामलों में 1 अक्टूबर तक फैसला आ जाना चाहिए। जिन मामलों में फैसले आने हैं उनमें कई संविधान पीठ ने सुने हैं। आधार, एससी एसटी प्रोन्नति में आरक्षण, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश, व्याभिचार में सिर्फ पुरुष दोषी क्यों, मस्जिद को नमाज के लिए इस्लाम का अभिन्न हिस्सा न मानने वाले फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है कि नहीं, समलैंगिता, गंभीर अपराध में आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने पर लगे रोक, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कार्यवाही का सजीव प्रसारण, सांसद और विधायकों को वकालत से रोकने की मांग, दहेज कानून में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग पर जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई करके फैसले सुरक्षित रखे हैं। इसके अलावा दाऊदी बोहरा महिलाओं के खतना प्रथा पर रोक पर भी मुख्य न्यायाधीश की पीठ सुनवाई कर रही है इसमें भी इसी बीच सुनवाई पूरी होकर फैसला आने की उम्मीद है।

आधार कानून की वैधानिकता को निजता के अधिकार की दुहाई देते हुए चुनौती दी गई है। इस समय आधार नंबर खाता खोलने से लेकर पासपोर्ट बनवाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक सभी जगह मांगा जाता है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्यापक असर होगा। रामजन्म भूमि के मालिकाना हक का मुख्य मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन इसी से जुड़े एक हिस्से पर कोर्ट का फैसला सुरक्षित है जिसमें मुस्लिम पक्षकारों ने 1994 के एम फारुखी फैसले को बड़ी पीठ को पुनर्विचार के लिए भेजने की मांग की है।

अयोध्या में भूमि अधिग्रहण के बारे में दिए गये फारुखी के फैसले में पांच जजों की पीठ ने कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। नमाज मस्जिद के बाहर भी पढ़ी जा सकती है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि इस फैसले का असर राम जन्मभूमि के मुख्य मुकदमें में पड़ सकता है। एससी एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण के लिए पिछड़ेपन और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के आंकड़े जुटाने की व्यवस्था देने वाले एम नागराज फैसले पर पुनर्विचार की मांग पर भी फैसला आएगा। सरकार और आरक्षण समर्थकों का कहना है कि पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाने का फैसला सही नहीं है क्योंकि एससी एसटी अपने आप में पिछड़े माने जाते हैं।

राष्ट्रपति द्वारा जारी सूची में शामिल होने के बाद उनके पिछड़ेपन के अलग से आंकड़े जुटाने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आने वाले फैसले का समाज पर व्यापक असर होगा क्योंकि आरक्षण हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है। गंभीर अपराध में आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने से रोकने की मांग पर आने वाला फैसला राजनीति की दिशा तय कर सकता है। सांसद विधायक के वकालत करने पर रोक की मांग पर आने वाला फैसला राजनीति के साथ वकालत कर रहे कई दिग्गज नेताओं को प्रभावित कर सकता है।

Posted By: Bhupendra Singh