जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आठ अक्टूबर को वायुसेना के 86वें स्थापना दिवस के मौके पर जब देश के जाबांज पायलट आसमान में अपनी वीरता का परचम लहराएंगे, ठीक उसी वक्त भारतीय वायुसेना का विटेंज एयरक्राफ्ट 'डकोटा' देश को 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध की याद दिलाएगा। द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल रहा वायुसेना का मालवाहक विमान 'डकोटा' की लोग पहली बार झलक देख सकेंगे।

कबाड़ में पहुंच चुके इस विमान के उद्धार में राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर का बहुत बड़ा हाथ है। उनके ही प्रयास से इसे ब्रिटेन में फिर से तैयार किया गया। 'राजीव चंद्रशेखर के अनुसार आज अगर श्रीनगर भारत का हिस्सा है तो उसका सारा श्रेय 'डकोटा' विमान को जाता है।

1947 के भारत-पाक युद्ध में इसी विमान ने सैनिकों को कश्मीर की धरती तक तीव्रता से पहुंचाया, जिससे पाक घुसपैठियों व सेना को करारा जवाब दिया जा सका।' बता दें कि इसे 1930 में रॉयल इंडियन एयर फोर्स के 12वें दस्ते में शामिल किया गया था।

1971 के युद्ध में भी इस विमान ने बांग्लादेश की मुक्ति में अहम भूमिका निभाई। ब्रिटेन ने इसे फिर से अत्याधुनिक स्वरूप प्रदान किया है।

सासंद राजीव चंद्रशेखर के मुताबिक उन्हें यह विमान 2011 में मिला था और इसी साल उन्होंने इसे वायुसेना को फिर से सुपुर्द कराया है। सासंद के पिता रिटायर्ड एयर कमाडोर एमके चंद्रशेखर इस विमान को उड़ाया करते थे। उनका इससे जुड़ाव युवा अवस्था में भी हो गया था।

Posted By: Bhupendra Singh

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