नई दिल्ली, जेएनएन। भारत ने जब से कोरोना रोधी वैक्सीन के निर्यात को लेकर हाथ खींचने के संकेत दिए हैं तब से कई देशों के होश उड़े हुए हैं। नई दिल्ली स्थित कई देशों के राजनयिक विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय के दूसरे आला अधिकारियों से मिलने का वक्त मांग रहे हैं। मकसद यही है कि भारत की तरफ से वैक्सीन आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए। दूसरी तरफ भारत की तरफ से अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है कि वह वैक्सीन निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगा रहा है लेकिन दूसरे देशों को वैक्सीन देने से पहले वह घरेलू मांग को पूरा करने पर ज्यादा ध्यान देगा।

देश में तेजी से बढ़ी वैक्‍सीन की मांग

अब जबकि देश में तेजी से वैक्सीन की मांग बढ़ने लगी है तो निर्यात को लेकर भारत की तरफ से और सख्ती किए जाने की संभावना है। भारत से वैक्सीन मांगने वाले देशों में नेपाल से लेकर यूरोपीय संघ तक शामिल हैं। अफ्रीका और पूर्वी एशियाई क्षेत्र के भी कई देश भारत की तरफ आस लगाए देख रहे हैं। नेपाल ने वैक्सीन की अतिरिक्त 10 लाख डोज की मांग है। इस बारे में जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से पूछा गया तो उन्होंने सीधा कोई जवाब नहीं दिया।

वैक्सीन निर्यात पर कोई रोक नहीं

अरिंदम बागची ने कहा, 'वैक्सीन मैत्री के तहत हमने अभी तक 6.45 करोड़ डोज दूसरे देशों को आपूर्ति की है। इसमें 1.04 करोड़ डोज तो हमने अनुदान के तौर पर मित्र देशों को दिए हैं। हमारी वैक्सीन की मांग भी ज्यादा है और कई देश इसके लिए लगातार अनुरोध भेज रहे हैं। हमारी तरफ से वैक्सीन निर्यात पर कोई रोक नहीं है, लेकिन पार्टनर देशों को समझना होगा कि वैक्सीन का निर्माण प्रमुख तौर पर भारत अपने नागरिकों को देने के लिए कर रहा है।'

भारत नहीं कर रहा कोई वादा

साफ है कि भारत अब कोई भी वादा नहीं कर रहा है। अभी भारत और चीन ही दो ऐसे देश हैं जो दूसरे देशों को वैक्सीन देने में सबसे आगे हैं। अमेरिका ने अभी तक वैक्सीन निर्यात को नहीं खोला है। यूरोपीय संघ भी ज्यादातर वैक्सीन घरेलू खपत के लिए रख रहा है और उसने 10 लाख अतिरिक्त डोज की मांग भारत से की है।

कई देशों को आपात स्थिति में वैक्सीन देने का वादा

पिछले एक हफ्ते में भारत ने बांग्लादेश को 12 लाख, भूटान को चार लाख, नेपाल को एक लाख, यूएन शांति दल को दो लाख और फिजी, नाइजीरिया और उरुग्वे को एक-एक लाख डोज आपातकालीन परिस्थितियों में देने का एलान किया है। बांग्लादेश और नेपाल समेत कई देशों को भारत पहले भी वैक्सीन दे चुका है। अब विदेश मंत्रालय संभवत: इतनी दरियादिली नहीं दिखा सकेगा।

डब्ल्यूएचओ भी भारत के संपर्क में

सूत्रों के मुताबिक पिछले दो दिनों के भीतर विदेश मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है ताकि अतिरिक्त वैक्सीन की स्थिति का अनुमान लगाया जा सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी भारत के संपर्क में हैं ताकि ऐसा ना हो कि भारत भी दूसरे देशों की तरफ वैक्सीन निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगा दे। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है जिस तरह से राज्यों की तरफ से टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है, उससे वैक्सीन की घरेलू मांग बढ़ने की संभावना है। कई राज्यों ने केंद्र को बताया है कि उनके पास अगले दो हफ्तों में वैक्सीन की कमी पड़ सकती है। 

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