संजय मिश्र, नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश में प्रियंका गांधी वाड्रा भले ही पिछले कुछ अर्से से लगातार योगी सरकार से मोर्चा ले रही हैं मगर उनकी यह सियासत भाजपा की बजाय बसपा सुप्रीमो मायावती को ज्यादा बेचैन कर रही है। शायद तभी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस के चौथे नंबर की पार्टी होने के बावजूद बसपा प्रमुख के प्रियंका के सियासी कदमों पर साधे जा रहे निशाने से कांग्रेस नेतृत्व विचलित नहीं है। इसके उलट पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि माया के हमलों से बेफिक्र प्रियंका आने वाले दिनों में योगी सरकार से सीधे सियासी मोर्चा लेने की अपनी सक्रियता में और इजाफा करेंगी।

प्रियंका और योगी सरकार के बीच प्रवासी मजदूरों को बस से उनके घर भेजने के विवाद के बाद मायावती ने उत्तरप्रदेश के कुछ मजदूरों के साथ राहुल गांधी के वीडियो को नाटक बताते हुए शनिवार को कांग्रेस पर जिस तरह हमला किया उसकी चर्चा करते हुए पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि अब संदेह की गुंजाइश नहीं कि प्रियंका के राजनीतिक कदम सूबे की सियासत में पहले से ज्यादा तेज होंगे। बेशक कोरोना महामारी काल की बंदिशों में जमीनी सक्रियता को गति देना अभी कठिन है लेकिन जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर सियासी मोर्चा लेने की सक्रियता बढ़नी तय है।

कांग्रेस का कहना है कि योगी सरकार और प्रियंका के बीच बीते दस महीने के दौरान जिन बड़े मुद्दों पर सियासी भिड़ंत हुई है उसमें बसपा प्रमुख ने कांग्रेस पर हमला कर भाजपा को परोक्ष रुप से बचाव कवच देने की कोशिश की है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के अनुसार प्रवासी मजदूरों के लिए 1000 बसों के भेजने के विवाद में मायावती के दो-तीन दिनों तक किए गए ट्वीट इसी ओर इशारा करते हैं। मजदूरों को बस से भेजने के मुद्दे पर केंद्र या योगी सरकार को कठघरे में खड़ा करने की बजाय मानवता की मदद के कांग्रेस के प्रयासों पर ही बसपा का निशाना यह दर्शाता है कि प्रियंका गांधी की सूबे की सियासत में बढ़ रही पैठ से मायावती परेशान हो रही हैं।

वहीं गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस प्रवक्ता राजीव शुक्ल कहते हैं कि प्रियंका गांधी मजदूरों की दुर्दशा से व्यथित और भावुक हैं इसीलिए मानवता के नाते हर संभव मदद करना चाहती हैं। प्रियंका की मजदूरों की मदद को राजनीतिक बताकर निशाना बनाना गलत है क्योंकि न अभी देश में कहीं चुनाव है और न हीं उत्तरप्रदेश में। शुक्ल के मुताबिक वैसे भी योगी सरकार से जनहित के मुद्दों पर प्रियंका संघर्ष कर रही हैं और मायावती पर कोई निजी हमला नहीं कर रहीं। ऐसे में सूबे की भाजपा की बजाय कांग्रेस पर हमले में दिख रही बसपा की सियासी परेशानी साफ दिखाई दे रही है।

कांग्रेस का मानना है कि प्रवासी मजदूरों को बस से घर भेजने के मुद्दे पर ही नहीं सोनभद्र के बड़े हत्याकांड के मामले में भी प्रियंका गांधी वाड्रा ने योगी सरकार को सियासी रुप से बैकफुट पर धकेला तब भी मायावती ने कांग्रेस को घेरने का प्रयास कर प्रदेश सरकार को राहत देने की कोशिश की। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान प्रदेश में शासन-प्रशासन की ज्यादतियों के खिलाफ प्रियंका सबसे मुखर रही हैं और पुलिस की गोली से मारे गए छात्र के परिजनों से मिलने गई। आंदोलन में हुई ज्यादतियों की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग लेकर जाने में भी प्रियंका की अहम भूमिका रही और बसपा नेतृत्व इन मुद्दों पर भी कांग्रेस के रुख से असहज हुआ।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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