जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रवाद के राजनीतिक विमर्श में भाजपा के एकाधिकार को चुनौती देने की जरूरत कांग्रेस में शिद्दत से महसूस की जा रही है। विशेषकर देश के युवा वर्ग को पार्टी की वैचारिक धारा से जोड़ने के लिए यह ज्यादा जरूरी माना जा रहा है। कांग्रेस इसके मद्देनजर ही 1971 के युद्ध में भारत की जीत के साथ पाकिस्तान को दो टुकड़े कर बांग्लादेश के निर्माण का स्वर्ण जयंती वर्ष जोर-शोर से मनाएगी। इसके तहत बांग्लादेश युद्ध की तस्वीरें, वीडियो और देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अहम फैसलों व भाषणों से जुड़ी सामग्रियों को पार्टी देश के दूर-दराज के इलाकों में पहुंचाएगी।

1971 के युद्ध में विजय इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल ही नहीं, स्वतंत्रता के बाद भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी सामरिक और कूटनीतिक जीत मानी जाती है। राजनीतिक विरोधी भी पाकिस्तान को दो टुकड़े करने वाले इस जंग में भारत की जीत का श्रेय इंदिरा गांधी के मजबूत नेतृत्व को देते रहे हैं। तभी कांग्रेस राष्ट्रवाद की प्रतिस्पर्धा में आने के लिए इंदिरा गांधी की विरासत से युवा पीढ़ी को जोड़ना चाहती है। 1971 के युद्ध की विजयगाथा का जश्न मनाने के लिए पार्टी जंग से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को दूर-दराज तक पहुंचाने के अलावा जिला स्तर पर देशभर में सम्मेलन और संगोष्ठियों का आयोजन भी करेगी।

पार्टी की विशेष समिति ने तैयार कर ली कार्यक्रमों की रूपरेखा

पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस आयोजन के लिए बनी विशेष समिति ने इन कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली है और मार्च से इन पर अमल की शुरुआत हो जाएगी। करीब एक साल तक चलने वाले इस कार्यक्रम का चरम 16 दिसंबर, 2021 को विजय दिवस का मौका होगा। इस दिन कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर बड़े कार्यक्रम के आयोजन की रूपरेखा बना रही है। इंटरनेट मीडिया की पहुंच और प्रभाव को देखते हुए एआइसीसी ही नहीं सूबे और जिले के स्तर पर भी पार्टी के इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉॅर्मो पर इस युद्ध से जुड़ी सामाग्री और तस्वीरें निरंतर पोस्ट की जाएंगी। जाहिर तौर पर इसका मकसद युवा वर्ग के बीच राष्ट्रवाद को लेकर कांग्रेस के बारे में पैदा की गई धारणाओं को तोड़ना है।

हरियाणा और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ब्लॉक स्तर पर होगा संगोष्ठियों का आयोजन

कांग्रेस 2014 के चुनाव से पहले ही राष्ट्रवाद पर भाजपा के आक्रामक विमर्श में पिछड़ने लगी थी और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 2019 के चुनाव से ठीक पहले हुए बालाकोट एयरस्ट्राइक के उपरांत यह सियासी बहस लगभग एकतरफा हो गया। इसका खामियाजा कांग्रेस को लगातार दूसरी बड़ी हार के रूप में चुकाना पड़ा। शायद इसीलिए राष्ट्रवाद और नरम हिंदुत्व दोनों को लेकर कांग्रेस अपने विमर्श को मौजूदा चिंतनधारा से अलग थलग नहीं रखना चाहती। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सरीखे राज्यों में सम्मेलनों और संगोष्ठियों का आयोजन ब्लॉक स्तर पर करने की तैयारी इसका साफ संकेत है। मालूम हो कि कांग्रेस कार्यसमिति की पिछली बैठक में 71 के युद्ध के 50वें वर्ष के आयोजन के लिए पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी की अगुआई में पार्टी ने एक विशेष आयोजन समिति का गठन किया था। इसमें फौजी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अम¨रदर ¨सह, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण और पूर्व रक्षा राज्यमंत्री भंवर जितेंद्र ¨सह आदि शामिल हैं।

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