संजय मिश्र, नई दिल्ली। राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में नए पार्टी अध्यक्ष की तलाश पर वरिष्ठ नेताओं के बीच अनौपचारिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक चुनौतियों के पहाड़ को देखते हुए संगठन की पृष्ठभूमि वाले मुखर चेहरे को कमान देने पर पार्टी में गंभीरता से मंथन किया जा रहा है।

चुनावी हार के बाद राहुल के इस्तीफे को पार्टी के इतिहास का सबसे गंभीर संकट मान रहे कांग्रेस दिग्गजों का मानना है कि इस हालात में कार्यकर्ताओं में भरोसा पैदा करने के साथ जनता से तार जोड़ने वाले चेहरे का नेतृत्व अपरिहार्य हो गया है। पार्टी में इस पर दो राय नहीं कि मौजूदा हालात में जंग में मोर्चा लेने वाले सेनापति जैसे नेतृत्व की जरूरत है और कठपुतली अध्यक्ष बनाए जाने की गुंजाइश नहीं दिख रही।

राहुल गांधी का इस्तीफा मंजूर कर नया अध्यक्ष चुनने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाए जाने से पूर्व वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही अनौपचारिक चर्चाओं मंे इन पहलूओं पर गंभीर मंथन किया जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि नये अध्यक्ष के लिए जिन चेहरों के नाम चर्चा में हैं उनके अलावा भी कुछ दूसरे नामों को संभावित दावेदारों की सूची में शामिल कर चिंतन-मनन किया जाएगा। इसी वजह से कार्यसमिति की बैठक की तारीख तय नहीं हुई है।

लगभग तय है कि अगले हफ्ते कार्यसमिति की बैठक बुलाई जाएगी जिसमें राहुल का इस्तीफा मंजूर कर नया अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। कांग्रेस के संविधान के अनुसार कार्यसमिति की बैठक के लिए कम से कम तीन दिन पहले नोटिस दिया जाना जरूरी है।

संगठन से जुड़े चेहरे को नया अध्यक्ष बनाने पर हो रहे मंथन पर पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि ऐसा व्यक्ति संगठन के साथ कार्यकर्ताओं और नेताओं के मिजाज को समझते हुए बेहतर समन्वय कर सकेगा। गांधी परिवार से बाहर से अध्यक्ष बने व्यक्ति के लिए कार्यकर्ताओं व नेताओं का भरोसा अर्जित करना कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा। ऐसे में संगठन का अनुभव उसके लिए कारगर होगा।

लोकसभा चुनाव में 17 राज्यों में खाता नहीं खुलने की स्थिति को अब कांग्रेस में अस्तित्व की बड़ी लड़ाई माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों ने कहा कि इसीलिए किसी रीढ़ विहीन को अध्यक्ष बनाए जाने की न कोई गुंजाइश है और न हालात। उनका कहना था कि बेशक कांग्रेस का नया अध्यक्ष गांधी परिवार का भरोसेमंद होगा मगर कठपुतली नहीं।

राजनीति की मौजूदा कठिन डगर और चुनौतियां कांग्रेस के लिए युद्ध का समय है। इसलिए इस वक्त पार्टी को 'वार टाइम जनरल' (युद्ध में मोर्चा संभालने वाला सेनापित) की जरूरत है।

दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में नेतृत्व के सबसे बेहतर चेहरे को कमान देने की संभावना इसीलिए भी ज्यादा है कि उत्तराधिकारी तय करने में राहुल गांधी का नजरिया सबसे प्रभावी भूमिका निभाएगा। इस वक्त सोनिया गांधी के लिए भी अड़चन की गुंजाइश खोजना आसान नहीं होगा।

राहुल ने इस्तीफे की अपनी चिठ्ठी में पहले ही इशारा कर दिया है कि वे सबको साथ लेकर चलने वाले प्रभावी चेहरे को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के पक्ष में हैं।

नये अध्यक्ष के चयन में कांग्रेस देश के बदले सामाजिक-राजनीतिक समीकरण की हकीकत की अनदेखी नहीं करना चाहती। इसीलिए चाहे सुशील कुमार शिंदे और मल्लिकार्जुन खडगे की दावेदारी पर विचार किया जा रहा हो मगर ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, आनंद शर्मा और अशोक गहलोत आदि जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा की दौड़ से बाहर नहीं माने जा रहे।

कांग्रेस के पुराने सामाजिक आधार को ध्यान में रखने के साथ राजनीति के मौजूदा समीकरणों की हकीकत में संतुलन बनाने वाले चेहरे का नेतृत्व पार्टी वक्त की जरूरत देख रही है।

कांग्रेस में इस पर भी दो राय नहीं कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक पराक्रम को चुनौती देने के लिए मुखर ही नहीं हिन्दी भाषी चेहरा होना बेहद जरूरी है। तभी उत्तर से लेकर पश्चिम और मध्य से लेकर पूर्वी भारत में भाजपा के एकतरफा संवाद के बयार को चुनौती दी जा सकेगी।

Posted By: Bhupendra Singh

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