मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में घिरे होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि समस्या का समाधान निकालने की बजाय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण हालात का मजाक उड़ा रही हैं। आटोमोबाइल सेक्टर में मंदी के लिए ओला-उबर को जिम्मेदार ठहराने के वित्तमंत्री के बयान को हास्यास्पद बताते हुए पार्टी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में मंदी का असर है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद हालत को संभालने के लिए आगे आकर कदम उठाना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर पीएम क्यों हालत पर बोलने से बच रहे हैं? आर्थिक मंदी की इस हालत में भारत 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य कैसे हासिल करेगा। वाहन उद्योग में मंदी के लिए एप आधारित टैक्सी सेवा कंपनियों ओला-उबर को जिम्मेदार ठहराकर वित्तमंत्री हास्यास्पद बातें कर रही है। उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

गंभीर आर्थिक विषयों पर भी वित्तमंत्री के हल्के बयानों का जिक्र करते हुए सिंघवी ने कहा कि जीडीपी दर में गिरावट को भी उन्होंने विकास का हिस्सा करार दिया था।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आटोमोबाइल सेक्टर का संकट बीते एक साल से अधिक से चल रहा है मगर सरकार ने बजट में इसका हल नहीं निकाला। वाहन उद्योग के संगठन सियाम के ताजा आंकड़ों के अनुसार अगस्त में वाहनों की ब्रिकी में 31 फीसद की गिरावट आयी है जो पिछले 19 सालों की सबसे खराब स्थिति है। 30,000 से ज्यादा लोगों की नौकरी गई है। सिंघवी ने कहा कि इससे साफ है कि आर्थिक मंदी का असर चौतरफा गांव-शहर सभी जगह है।

आटो सेक्टर की मंदी के लिए नये जमाने के लोगों की सोच को जिम्मेदार ठहराने के वित्तमंत्री के बयान का उल्लेख करते हुए सिंघवी ने कहा कि इस तर्क के हिसाब से सरकार रियल इस्टेट सेक्टर की मंदी के लिए भी इसी वर्ग को दोषी मान रही है। क्योंकि अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत में यह वर्ग मकान खरीदने की बजाय किराए के मकान में रहने को तवज्जो दे रहा है।

रियल इस्टेट सेक्टर अर्थव्यवस्था की सेहत का बड़ा संकेतक माना जाता है और हकीकत यह है कि महानगरों और 30 बड़े शहरों में 12.76 लाख नये बने मकान खरीददारों की बाट जोह रहे जिन्हें बिकने में चार से सात साल लग जाएंगे।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आर्थिक मंदी की वजह से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 35 लाख तो कृषि क्षेत्र में 2.60 करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर घट गए हैं। भारत का निर्यात और व्यापार कई सालों के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर आ गया है। सरकार का वित्तीय घाटा काफी बढ़ गया है और इसके असली आंकड़े छिपाए जा रहे हैं, जिस पर कैग ने भी सवाल उठाया है।

सिंघवी ने कहा कि अर्थव्यवस्था की इन चुनौतियों की वजह से बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की मांग घटी है और वित्तमंत्री सच कबूलने की बजाय बेतुके बयान देकर हालत की गंभीरता को छुपाने का नाकाम प्रयास कर रही हैं।

 

Posted By: Bhupendra Singh

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