जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने राफेल जेट खरीद में फ्रांसीसी कंपनी दासौ को विंडफॉल गेन (वित्तीय लाभ) का तोहफा देने का आरोप लगाते हुए एक बार सवाल उठाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि मोदी सरकार ने भारतीय वायुसेना की 126 विमानों की जरूरत की जगह केवल 36 राफेल की खरीद कर देश के साथ गलत किया है। साथ ही कहा कि 9 फीसद सस्ते खरीद के दावों से उलट मोदी सरकार ने 41 फीसद अधिक कीमत पर राफेल खरीदे हैं।

राफेल सौदे की कीमतों से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाते हुए चिदंबरम ने प्रेस कांफ्रेंस में सरकार पर यह वार किया। उन्होंने कहा कि सरकार यह सोच रही कि राफेल सौदे के सवालों को वह चुपचाप दबा देगी तो यह उसकी भूल है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद कांग्रेस ने कहा था कि यह विवाद खत्म नहीं हुआ है और गुरूवार को एक मीडिया रिपोर्ट में आए तथ्य हमारी बात को सही साबित करते हैं।

चिदंबरम ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने जहां 90 विमानों की खरीद नहीं कि वहीं 36 खरीदे गए विमानों के लिए प्रति जेट 186 करोड रूपये ज्यादा कीमत चुकाई। यूपीए की तुलना में 9 फीसद सस्ते सौदे की सरकार की बात भी गलत है। चिंदबरम ने कहा कि यूपीए ने 2007 में प्रति विमान 79.3 मिलियन यूरो बेसिक विमान की कीमत तय की। मुद्रास्फीति की वजह से 2011 में बढ़कर 100.85 मिलियन यूरो हो गया। एनडीए ने 2016 में अपनी डील में जो 9 फीसद डिस्काउंट हासिल की तो यह कीमत 91.75 मिलियन यूरो प्रति विमान हुई।

इसके बाद वायुसेना की ओर से भारत की जरूरतों के अनुकूल मांगे गए 13 विशेष साजो-समान, अस्त्र-शस्त्र के लिए 1300 मिलियन यूरो यूपीए और एनडीए दोनों के सौदे में तय हुए। चिदंबरम ने कहा कि मगर इसमें असल बात यह है कि यूपीए ने 1300 मिलियन की यह रकम सभी 126 राफेल विमानों के साजो-समान के लिए तय की थी। जबकि एनडीए ने 36 विमानों के लिए ही इतनी रकम चुकाने का समझौता किया है। इससे साफ है कि मोदी सरकार ने दासौ कंपनी को वित्तीय लाभ का यह तोहफा दिया है। उनका यह भी कहना था कि यूपीए के सौदे में 126 विमानों के लिए सन 2029 तक साढे दस साल में 1300 मिलियन यूरो की यह रकम दी जाती। वहीं एनडीए 2022 तक ही यह राशि दासौ को दे देगी।

चिदंबरम ने कहा कि इन नये तथ्यों से साफ हो गया है कि राफेल सौदे की हर प्रक्रिया के दौरान जबरदस्त अंदरूनी मतभेद थे। अधिकांश फैसले 4-3 के मुकाबले से लिए गए। उनके अनुसार सौदे को सिरे चढ़ाने वाली सात सदस्यीय वार्ताकारों की टीम के तीन सदस्यों ने हर गलत प्रस्तावों पर सवाल उठाते हुए विरोध जाहिर किया। चिदंबरम ने कहा कि हम वार्ता टीम के इन अफसरों की प्रशंसा करते हैं जो तमाम दबावों के बावजूद झुके नहीं। इसकी वजह से हर फैसला 4-3 की वोटिंग से लिया गया। इन तथ्यों के आलोक में चिदंबरम ने जेपीसी जांच की कांग्रेस की मांग फिर दोहराते हुए कहा कि राफेल सौदे की गहन जांच जरूरी है। 

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