नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। सचिन पायलट की राजस्‍थान के 25वें डिप्टी सीएम के तौर पर घोषणा के बाद उनके समर्थकों में जबरदस्‍त उत्‍साह है। सचिन पार्टी का युवा चेहरा होने के साथ-साथ पार्टी अध्‍यक्ष राहुल गांधी की युवा बिग्रेड के भी साथी हैं। इसके अलावा राजस्थान कांग्रेस के वह अध्‍यक्ष भी हैं। वर्तमान में राजस्‍थान में जो चुनाव हुए हैं उसमें एक जीत की बड़ी वजह सचिन पायलट भी हैं। ऐसा इसलिए भी क्‍योंकि विधानसभा चुनाव से पहले राज्‍य में हुए कुछ उप-चुनावों में भी कांग्रेस ने सफलता हासिल की थी। बहरहाल, मुख्‍यमंत्री के मुद्दे पर उन्‍होंने अशोक गहलोत के नाम को पीछे छोड़कर अपना कद काफी बढ़ा लिया है। 

गहलोत के साथ यदि उनके राजनीतिक करियर की बात की जाए तो यह निश्चित तौर पर काफी कम है, लेकिन उन्‍होंने केंद्र समेत राज्‍य की राजनीति में जो मजबूत कदम रखे हैं उनको देखकर कहा जा सकता है कि वह खुद को बेहतर उप मुख्‍यमंत्री साबित कर सकेंगे। जहां तक उनके राजनीतिक करियर की बात है तो उन्‍होंने अपनी शादी से पहले राजनीति में उतरने के बारे में सोचा तक नहीं था। अपने पिता राजेश पायलट की मौत के बाद उन्हें राजनीति में उतरना पड़ा। जिस समय सचिन ने राजनीति के मैदान में कदम रखा उस समय उनकी उम्र महज 26 साल थी। सचिन ने 2004 के लोकसभा चुनावों में दौसा (राजस्थान) से बड़ी जीत हासिल की। सचिन पायलट जब 15वीं लोकसभा के लिए चुने गए तो उन्‍हें केंद्र में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।

सचिन पायलट गुज्जर समुदाय से हैं। उनके पिता स्वर्गीय राजेश पायलट थे जो कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में से थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में हुई। उन्होंने अपने स्नातक की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से हासिल की। इसके बाद पायलट ने अमेरिका के पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के व्हॉर्टन स्कूल से एमबीए की डिग्री भी हासिल की। वर्ष 2002 में भारत वापस आने पर उन्‍होंने कांग्रेस की सदस्‍यता हासिल की। महज 26 साल की उम्र में वे संसद पहुंचने वाले सबसे युवा सांसद थे।

जहां तक उनके पारिवारिक जीवन की बात है तो वह भी काफी दिलचस्‍प रही है। आपको बता दें कि उनकी जीवन संगिनी जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री फारुख अब्‍दुल्‍लाह की बेटी हैं। दरअसल सारा के पिता फारूख अब्दुल्लाह, दादा शेख अब्दुल्लाह, भाई उमर अब्दुल्लाह और फूफा गुलाम मोहम्मद शाह जम्मू-कश्मीर के सीएम रहे हैं। लंदन में पढ़ाई के दौरान सचिन की मुलाकात सारा अब्दुल्लाह से हुई थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद जहां सचिन स्‍वदेश लौट आए वहीं सारा अपनी पढ़ाई के लिए लंदन चली गईं। समय के साथ उनका प्‍यार भी परवान चढ़ने लगा और दोनों ने ही शादी करने का फैसला किया। लेकिन यहां पर उनके सामने धर्म की दीवार आड़े आ गई। सचिन के परिवार ने दोनों की शादी के लिए इंकार कर दिया। वहीं, सारा के पिता फारुख अब्दुल्ला ने भी उनसे इस बारे में बात करने से मना कर दिया। बाद में इन दोनों ने किसी की परवाह किए बिना जनवरी 2004 में शादी कर ली। इस शादी में अब्दुल्ला परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ था। हालांकि इस समय तक सचिन का परिवार उनके साथ खड़ा था। 

कांग्रेस ने गहलोत पर जताया भरोसा, लंबा प्रशासनिक अनुभव और जादूगरी आई काम

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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