जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कर्नाटक में बड़ी जीत को लेकर आश्वस्त भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने औपचारिक परिणाम आने से पहले ही 2019 लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के लिए कमर कसना शुरू कर दिया है। सोमवार को सभी प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री और राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि लगातार जीत से उत्साहित जरूर हों, लेकिन अभी आत्मसंतुष्ट होने का वक्त नहीं है। अभी लंबा सफर है जिसमें पश्चिम बंगाल, केरल, ओडिशा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को फतह करना बाकी है।

- अगले एक साल के कार्यक्रमों का खाका तैयार

सरकार के चार साल 26 मई को पूरे हो रहे हैं और अब माना जा सकता है कि चुनावी साल शुरू हो चुका है। सोमवार को भाजपा मुख्यालय में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में लंबी बैठक शुरू हुई तो वहां भी कुछ ऐसा ही माहौल था। प्रदेश अध्यक्षो, प्रदेश प्रभारियों व संगठन महामंत्रियों से पूरे साल के कामकाज का लेखा जोखा लिया गया। राज्यों की अलग अलग समूहों में बैठक हुई। फिर सामूहिक चर्चा हुई और भविष्य की योजनाओं का खाका बना। पूरे क्रम में इसका ध्यान रखा गया कि राज्यवार जो बड़े मुद्दे हैं उस पर रणनीति में धार आए और किसी भी स्तर पर वैचारिक सिद्धांतों से समझौता न हो। 17 मई को सभी मोर्चो की कार्यसमिति होगी और उसे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संबोधित करेंगे।

बहरहाल, सोमवार को ही शाह ने यह मंशा जाहिर कर दी कि वह लोकसभा में पिछली बार से भी बड़ी जीत चाहते हैं और थोड़ी मशक्कत की जाए तो जनता इसके लिए तैयार है। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि शाह ने एक तरह से चुनावी बिगुल ही बजा दिया है। परोक्ष रूप से यह संकेत भी दे दिया है कि भाजपा के लिए किन किन राज्यों से सीटें बढ़ेंगी।

उन्होंने थोड़ा आगाह भी किया और कहा कि जीत से उत्साहित जरूर हों, लेकिन आत्मसंतुष्ट न रहें। ध्यान रहे कि शाह ने पहले ही अपने कई मंत्रियों व पदाधिकारियों को उन सीटों की जिम्मेदारी दी है जहां भाजपा अब तक नहीं जीती है। जो नया लक्ष्य रखा गया है उसमें पश्चिम बंगाल और ओडिशा पर खास नजर है। ओडिशा में जहां लोकसभा के साथ ही विधानसभा में बहुमत हासिल करने की है। वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा 2 सांसदों से 22 तक का सफर पार करना चाहती है।

एक सवाल के जवाब में भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि दलितों को लेकर भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है। सच्चाई यह है कि दलितों के लिए मोदी सरकार ही काम कर रही है। स्टार्ट अप कैपिटल में दलितों को 136 करोड़ का ऋण दिया गया है जबकि कुछ दलित नेता ने मूर्तियों पर इतना खर्च कर दिया था। एक अन्य सवाल के जवाब में भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के खिलाफ कुछ दल इकट्ठे होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता भाजपा के साथ है।

Posted By: Bhupendra Singh

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