नई दिल्‍ली, एएनआइ। भारत के कुछ सांसदों ने चीन की दुखती रग पर जैसे हाथ रख दिया हो... देश के सांसदों के तिब्‍बती सरकार की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्‍सा लेना चीन को इस कदर नागवार गुजरा है कि बौखलाहट में उसने इस पर गंभीर चिंता प्रकट की है। समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में चीनी दूतावास ने निर्वासित तिब्बती संसद द्वारा आयोजित रात्रिभोज में भाग लेने वाले सांसदों के एक समूह की भागीदारी पर चिंता व्यक्त करते हुए उनसे तिब्बती स्वतंत्रता के हिमायती बलों को सहायता प्रदान करने से परहेज करने के लिए कहा है।  

पिछले हफ्ते केंद्रीय राज्‍य मंत्री राजीव चंद्रशेखर समेत कुछ सांसदों ने निर्वासित तिब्‍बती सरकार की ओर से आयोजित एक रात्रिभोज कार्यक्रम में हिस्‍सा लिया था। भारतीय सांसदों के दल में बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सुजीत कुमार, भाजपा सांसद मेनका गांधी, केसी राममूर्ति, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और मनीष तिवारी शामिल थे। दिल्‍ली में चीन के दूतावास ने इसे लेकर चिंता जताई है। चीन के पोलिटिकल काउंसलर झोउ योंगशेंग ने एक पत्र में कहा- मैंने देखा है कि आपने तथाकथित 'तिब्बत के लिए सर्वदलीय भारतीय संसदीय मंच' द्वारा आयोजित एक गतिविधि में भाग लिया है और तथाकथित 'निर्वासित तिब्बती संसद' के कुछ सदस्यों के साथ बातचीत की है।

चीनी काउंसलर ने लिखा- 'जैसा कि सभी जानते हैं तथाकथित निर्वासित तिब्बती सरकार पूरी तरह से चीन के संविधान और कानूनों का उल्लंघन करने वाला एक अवैध संगठन है। इसे दुनिया के किसी भी देश में मान्यता नहीं मिली है।' दिल्ली में चीनी दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तिब्बत प्राचीन काल से उसका एक अविभाज्य हिस्सा रहा है। तिब्बत से संबंधित मामले विशुद्ध रूप से चीन के आंतरिक मामले हैं जो किसी भी विदेशी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देते हैं। चीन किसी भी देश में तिब्बती स्वतंत्रता बलों द्वारा आयोजित गतिविधियों का दृढ़ता से विरोध करता है।

वहीं निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रवक्ता तेनजि‍न लेक्षय ने चीन की खिंचाई करते हुए कहा कि तिब्बत के लिए भारत की निरंतर एकजुटता चीन को असहज करती रही है। तिब्बत के लिए आल पार्टी इंडियन पार्लियामेंट्री फोरम की शुरुआत 1970 में एमसी छागला ने की थी। कई महान भारतीय नेताओं ने अतीत में तिब्बत का समर्थन किया था। मौजूदा वक्‍त में भी अधिकांश भारतीय नेता इसका समर्थन करते हैं। यदि चीन वाकई तिब्बत और तिब्बती लोगों की भलाई के बारे में गंभीर हैं तो उसे बातचीत के माध्यम से इस मसले को सुलझाने के लिए काम करना चाहिए। बता दें कि यह कार्यक्रम 22 दिसंबर को दिल्‍ली में आयोजित हुआ था।

Edited By: Krishna Bihari Singh