जासं, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्यपाल जगदीप धनखड़ की ओर से दो विधेयकों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी शामिल नहीं हुई। उन्होंने इसका कारण व्यस्तता को बताया है। गौरतलब है कि एनपीआर को लेकर केंद्रीय गृहमंत्रालय की ओर से बुलाई गई बैठक में भी वह शामिल नहीं हुईं।

व्यस्तता के चलते राज्यपाल ने बुलाई बैठक में मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुईं

राजभवन ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने राज्यपाल के सचिवालय को सूचित किया कि शुक्रवार को पहले से तय कार्यक्रमों के कारण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बैठक में शामिल होना संभव नहीं होगा। गौरतलब है कि राज्यपाल बनने के बाद से धनखड़ और बनर्जी एवं उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के बीच कई मामलों पर टकराव चल रहा है।

विधानसभा में पारित दो विधेयकों पर चर्चा के लिए राज्यपाल ने बैठक बुलाई थी

इसी बीच राज्यपाल ने विधानसभा में पारित उन दो विधेयकों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी, जिन पर उनकी (राज्यपाल की) मंजूरी का इंतजार है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को इस मामले को प्राथमिकता देने और इन मामलों पर चर्चा की खातिर बैठक के लिए जल्द से जल्द समय निकालने की अपील की है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता ने 21 जनवरी को बैठक बुलाए जाने का अनुरोध किया

बयान में कहा गया है कि बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान और वाम मोर्चा के विधायक दल के नेता सुजान चक्रवर्ती ने बैठक 21 जनवरी को किए जाने का अनुरोध किया है। इसमें कहा गया है कि बैठक तय समय पर उक्त तिथि को होगी।

बंगाल पर भारी पड़ सकता है एनपीआर का विरोध

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का बंगाल में लागू न करने का एलान कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले ही मोदी सरकार से अपने विरोध का रंग गाढ़ा कर रही हैं, लेकिन इससे वह अपने राज्य के नागरिकों के हितों की अनदेखी भी कर रही है। इसके विरोध में वह तर्को का पहाड़ खड़ा कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों की दलील है कि अगर एनपीआर में नागरिक अपना ब्योरा दर्ज नहीं कराएंगे तो बंगाल को इसका खामियाजा चुकाना पड़ सकता है। राज्य के नागरिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं।

Posted By: Bhupendra Singh

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