नई दिल्‍ली, जेएनएन। ईवीएम को लेकर राजनीतिक विवाद जोरों पर है और राजनीतिक दलों की ओर से फिर से बैलट से चुनाव कराने क मांग उठने लगी है। ऐसे मे मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत साफ करते हैं कि वैसी पुरानी व्यवस्था पर लौटना संभव नहीं जिसमें बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाओं ने जन्म लिया था। वहीं आधार की अनिवार्यता को लेकर मतभेद और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच उनका मानना है कि वोटर आइकार्ड से आधार को लिंक करने से अपराधीकरण पर भी रोक लग सकती है। 'दैनिक जागरण' के विशेष संवाददाता शिवांग माथुर से बातचीत का एक अंश:

सवाल: चुनावों में राजनीतिक दलों के निशाने पर ईवीएम मशीनें रहीं। मशीनों की गड़बड़ी के आरोपों पर आपकी क्या राय है?
जवाब: मेरी राय में जो पार्टी चुनाव जीतती हैं, वह कभी यह आरोप नहीं लगाती कि मशीन में गड़बड़ी है। जिस वक्त यह मामला सामने आना शुरू हुआ उस वक्त तमाम दल अलग-अलग राज्यों में चुनाव जीते हैं। मशीन में कोई गड़बड़ी होने का प्रश्न ही नहीं उठता। कुछ लोग केवल भ्रांति फैलाने का काम कर रहे हैं। चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहा है। कुछ दल ऐसे हैं जब उन्हें 95 फीसद वोट मिलते हैं तो मशीन अच्छी हो जाती हैं और चुनाव हारने पर मशीन में गड़बड़ी बताते हैं।

सवाल: तृणमूल कांग्रेस सहित कई दल तो बैलट पेपर से चुनाव कराने पर जोर दे रहे हैं?
जवाब: राजनीतिक दलों की मांग को देखते हुए वीवीपैट का इस्तेमाल 100 फीसद शुरू किया गया है। पुराने समय में लौटने की कोई जरूरत नहीं। बैलट पेपर से चुनाव कराना उचित नहीं होगा। क्योंकि इसमें सबसे बड़ी समस्या बूथ पर कब्जा करने की होती है।

सवाल: देश में एक साथ चुनाव कराने पर चुनाव आयोग की क्या राय है?
जवाब: सरकार ने एक देश एक चुनाव पर राय मांगी थी। इसके लिए संविधान में संशोधन करने की जरूरत होगी। यह संसद को करना होगा। मेरी राय में अगर ऐसा होता है तो यह देश हित में ही होगा। हमें ज्यादा मशीनों की जरूरत पडे़गी। ज्यादा स्टेट मशीनरी और ज्यादा सुरक्षा बलों की जरूरत पड़ेगी।

सवाल: कुछ पार्टियां एक देश एक चुनाव को राजनैतिक संकट की तरह देखती हैं। आपका क्या कहना है?
जवाब: किसी भी राजनीतिक दल को खतरा महसूस करने की जरूरत नहीं हैं। देश का वोटर बहुत समझदार है। बार-बार चुनाव होने से पूरे पांच साल राजनीतिक दलों के बीच गाली-गलौच और एक दूसरे को कोसा जाता है। परिपक्व लोकतंत्र के लिए एक सरकार हो और बाकी दल पांच साल विपक्ष की मजबूत भूमिका निभाएं। इससे जनता के मुद्दों पर सरकारें ज्यादा ध्यान दे पाएंगी। लगातार चुनावी प्रक्रिया के चलते राज्य की मशीनरी चुनाव कराने में ही लगी रहती हैं।

सवाल: चुनावी चंदे पर अब भी पारदर्शिता नहीं दिखाई पड़ती। इसके लिए क्या किया जा सकता है?
जवाब: सरकार को हमने यह सुझाव दिया है कि जिस तरह से प्रत्याशी पर चुनावी खर्च की सीमा है, वैसे ही राजनीतिक दलों पर भी होनी चाहिए। इलेक्टोरल बांड का असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।

सवाल: चुनाव सुधार के लिए आयोग क्या कदम उठा रहा हैं?
जवाब: चुनाव सुधार की प्रक्रिया में सबसे जरूरी कदम राजनीति में अपराधीकरण रोकना है। वहीं मेरी राय में आधार को वोटर आईडी से जोड़ना बहुत जरूरी है। इससे चुनाव में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े से बचा जा सकेगा। अब तक देश में 32 करोड़ लोगों ने आधार को वोटर आईडी से जोड़ा है। हमने सुप्रीम कोर्ट से कहा है की इसको अनिवार्य किया जाए कि जिस भी व्यक्ति के पास आधार है वह उसे वोटर आईडी से लिंक कराए।

सवाल: डिजिटल इंडिया में वह तस्वीर कब सामने आएगी जब वोटर घर बैठे वोट डाल सकेगा?
जवाब: मोबाइल से जिस दिन हर व्यक्ति वोट डाल सकेगा वह दिन बहुत खास होगा। आयोग धीरे-धीरे इसकी ओर कदम बढ़ा रहा है। हम सतर्कता को जरूर ध्यान में रख रहे हैं। जब मशीनों पर सवाल उठ सकते हैं तो उसपर भी प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

 

Posted By: Manish Negi