नीलू रंजन, नई दिल्ली। एयरसेल-मैक्सिस डील मामले में सीबीआइ पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। सीबीआइ को कुछ नए तथ्य मिले हैं, जिसे पूरक आरोप में शामिल किया जाएगा। सीबीआइ ने पहले आरोपपत्र में चिदंबरम पर जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर एयरसेल में मैक्सिस के विदेशी निवेश की मंजूरी देने का आरोप लगाया था। साथ ही इसके एवज में चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की कंपनी में निवेश के जरिए 1.13 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का खुलासा भी किया है।

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एयरसेल-मैक्सिस डील में चिदंबरम के खिलाफ नए सबूत सामने आ रहे हैं। सीबीआइ इन सबूतों की जांच कर रही है और सही पाए जाने की स्थित में उसे पूरक आरोपपत्र में शामिल किया जाएगा।

सीबीआइ का मानना है कि मौजूदा आरोपपत्र में भी चिदंबरम के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। उनके अनुसार मैक्सिस की ओर से एयरसेल में 3,560 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी देने के बदले चिदंबरम के बेटे कार्ति की कंपनी में रिश्वत ली गई थी और खुद पी चिदंबरम भी इस साजिश में शामिल थे।

जांच एजेंसियों की निगाह से बचने के लिए इस रकम को उन कंपनियों में लिया गया, जिन पर कार्ति का नियंत्रण था। मैक्सिस की सहायक कंपनियों के द्वारा कार्ति की कंपनियों में निवेश किया गया।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सीबीआइ ने अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि अडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड ने मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विसेज के नाम पर एयरसेल से 29 मार्च, 2006 को 27.55 लाख रुपये हासिल किए थे। यह कंपनी चिदंबरम परिवार के वित्तीय मामलों को संभालने वाले एस. भास्करन के नेतृत्व में काम करती थी।

सीबीआइ ने अपने आरोपपत्र में कहा कि इस कंपनी के पास कंसल्टेंसी देने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ ही नहीं थे और न ही कोई कंसल्टेंसी एयरसेल को दी गई थी।

 

Posted By: Bhupendra Singh